शोर भी एक बड़ी वजह
पुलिस ने पर्यावरणीय अपराधों के तहत दर्ज किए जाने वाले कुल मामलों के करीब 20 फीसदी (8,400) एक नई श्रेणी के तहत दर्ज किए थे। यह नहीं श्रेणी ध्वनि प्रदूषण की है। माना जाता है कि शोर के चलते जंगलों को बेतहाशा नुकसान पहुंचता है।
तमिलनाडु में पर्यावरणीय अपराध सबसे ज्यादा
तमिलनाडु में पर्यावरणीय अपराध सबसे ज्यादा दर्ज किए गए हैं। कुल 29,659 मामलों में से करीब 70 फीसदी यानी 20,640 मामले तमिलनाडु में दर्ज किए गए। वहीं, 23 फीसदी के साथ इस मामले में केरल दूसरे स्थान (6,743) पर है। पुलिस ने 3,842 मामले भारतीय वन कानून, पर्यावरण संरक्षण कानून और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत दर्ज किए।
पर्यावरण संबंधित अपराध: 2016-2017
सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम, 2003- आंकड़े उपलब्ध नहीं - 29,659
ध्वनि प्रदूषण अधिनियम: आंकड़े उपलब्ध नहीं - आंकड़े उपलब्ध नहीं - 8,423
वन कानूनों: 3,715-3,016
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम-859-826
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम-122-171
वायु और जल प्रदूषण अधिनियम-36-36
राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण अधिनियम- आंकडे़ उपलब्ध नहीं-12
पर्यावरण और प्रदूषण से संबंधित कानून-4,732-42,143