तीन साल पहले देश भर में शुरू हुए स्वच्छ भारत अभियान के तहत देश भर के 195 जिलों में मौजूद 2 लाख से अधिक गांव पूरी तरह खुले में शौच करने से मुक्त हो चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर यूनिसेफ ने भी पूरी तरह से कमर कसते हुए देश भर में इस अभियान को तेज करने का भरोसा दिया है। यूनिसेफ का प्लान है कि वो इस अभियान के तहत सरकार को 2019 से पहले पूरे देश को खुले में शौच करने से मुक्त कर दे।
यूनिसेफ और सरकार की तरफ से मंगलवार को आकंड़े जारी करते हुए पेयजल व स्वच्छता मंत्रालय में सचिव परमेश्वरन अय्यैर ने कहा कि देश के पांच राज्य पूरी तरह से शौच मुक्त हो चुके हैं।
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इन राज्यों में सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, केरल, हरियाणा और उत्तराखंड शामिल हैं। वहीं देश के 10 अन्य राज्य मार्च 2018 तक इससे मुक्त हो जाएंगे। अभी देश भर के 2 लाख 36 हजार गांव में कोई भी व्यक्ति खुले में शौच करने के लिए नहीं जाता है।
अय्यैर ने कहा कि वहीं स्वच्छता की कमी से देश में चलने वाले अन्य विकास कार्यक्रमों पर असर पड़ता है और देश की अर्थव्यवस्था पर भी बुरा प्रभाव देखने को मिलता है।
4.6 करोड़ घरों में हुआ टॉयलेट का निर्माण
स्वच्छ भारत मिशन के तहत अभी तक देश के 4.6 करोड़ घरों में टॉयलेट का निर्माण हो चुका है। वहीं पब्लिक सेक्टर की मदद से स्कूलों में भी कई लाख टॉयलेट्स को बनाया गया है। स्वच्छता के तहत पूरे देश की 67.5 फीसदी जनता को इस अभियान के तहत जोड़ लिया गया है।
हर साल हो रही है 50 हजार रुपये की बचत
यूनिसेफ के चीफ (WASH) निकोलस ऑस्बर्ट ने कहा कि 2 लाख से अधिक घरों में टॉयलेट बनने से हर साल 50 हजार रुपये का फायदा हुआ है। लाभ अनुपात का जिक्र करते हुए निकोलस ने बताया कि इस अभियान से सरकार को एक रुपया निवेश करने पर 4.30 रुपये की सीधे-सीधे बचत हो रही है।
इस अभियान का फायदा उन लोगों को हो रहा है जो काफी गरीब वर्ग से है। निकोलस ने कहा कि पीएम द्वारा स्वच्छता ही सेवा अभियान के इन 15 दिनों में काफी फायदा उठाया जा सकता है। यह जिंदगी में एक बार मिलने वाला अवसर है जिससे हम देश को काफी आगे ले जा सकते हैं।