महाराष्ट्र में जारी सियासी संघर्ष पर विराम लगाने के लिए बहुमत परीक्षाण करवाना एक विकल्प हो सकता है क्योंकि इससे परेशानियों का हल मिलने की उम्मीद है। कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना लगातार कह रही है कि उनके पास सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत है और नवनियुक्त सरकार अल्पमत में हैं। शनिवार को सभी को चौंकाते हुए देवेंद्र फडणवीस ने दोबारा राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। वहीं भाजपा की विरोधी पार्टी एनसीपी के वरिष्ठ नेता अजित पवार ने उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
यदि एक से ज्यादा लोग सरकार बनाने का दावा करते हैं और बहुमत स्पष्ट नहीं होता है तो राज्यपाल यह देखने के लिए एक विशेष सत्र बुला सकते हैं। ताकि यह देखा जा सके कि किसके पास बहुमत है। कुछ विधायक अनुपस्थित हो सकते हैं या वोट न देना स्वीकार कर सकते हैं।
ऐसी स्थिति में बहुमत की गणना वर्तमान और मतदान के आधार पर की जाती है। महाराष्ट्र की वर्तमान स्थिति में फडणवीस पहले ही मुख्यमंत्री और अजित पवार उप-मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ले चुके हैं। वहीं कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना ने उनके खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया है।