फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चीनी फौज की पुरानी आदत है पत्थर फेंकना, 61 साल पहले हॉट स्प्रिंग में धोखे से मार डाले थे हमारे दस जवान

Tue, 26 May 2020 07:19 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सीआरपीएफ से रिटायर्ड और हॉट स्प्रिंग मिशन के एकमात्र जीवित लद्दाखी हीरो सोनम वांग्याल (78) ने गत वर्ष लेह से अमर उजाला कॉम के साथ खास बातचीत में यह खुलासा किया था...
विज्ञापन
PLA china Army - फोटो : सांकेतिक
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

चीनी सेना पैंगोंग त्सो झील के पास भारतीय सैनिकों का सामना करने के लिए हाथों में लाठी, डंडे, कांटेदार तार और पत्थर लेकर खड़ी है। अगर इतिहास में जाएं तो मालूम होता है कि हाथों में पत्थर लेकर विवाद शुरू करना चीनी फौज की पुरानी आदत है।

विज्ञापन

61 साल पहले लद्दाख के हॉट स्प्रिंग इलाके में चीनी सैनिकों ने धोखे से हमारे दस जवान मार डाले थे। भारत और चीन के सैनिक आमने-सामने थे। आईटीबीएफ के डीएसपी कर्मसिंह ने चीनी फौज के सामने अपने हाथ में मिट्टी उठाकर कहा, यह जमीन हमारी है। आप यहां से वापस लौट जाओ।

चीनी सैनिक वापस तो नहीं गए, लेकिन वे वैसा ही करने लगे, जैसा हमारे डीएसपी कर रहे थे। उन्होंने भी मिट्टी उठा ली। अगले दिन दोपहर तक यह खेल चलता रहा। चीनी सैनिक लड़ाई का बहाना तलाश रहे थे, जो उन्हें मिल भी गया।
विज्ञापन


उन्होंने लड़ाई का बहाना एक पत्थर को बनाया। वह पत्थर, जिसे चीनी फौज के कमांडर ने हमारे सैनिकों पर फेंका था। जब भारतीय जवानों ने इसका विरोध किया तो चीनी फौज ने उन पर चारों तरफ से फायरिंग शुरू कर दी।  
 

सीआरपीएफ से रिटायर्ड और हॉट स्प्रिंग मिशन के एकमात्र जीवित लद्दाखी हीरो सोनम वांग्याल (78) ने गत वर्ष लेह से अमर उजाला कॉम के साथ खास बातचीत में यह खुलासा किया था। वांग्याल ने 1965 में मात्र 25 साल की आयु में एवरेस्ट फतह की थी।

नई दिल्ली के चाणक्यपुरी इलाके में बने पुलिस मेमोरियल के अनावरण समारोह में पीएम नरेंद्र मोदी ने सोनम वांग्याल को सम्मानित किया था। वांग्याल का कहना था कि 1962 की लड़ाई से पहले चीनी सैनिकों ने 1959 में लेह-लद्दाख के कई इलाकों में जबरदस्त घुसपैठ की थी।

अक्तूबर के महीने में सोलह हजार फुट की ऊंचाई पर लद्दाख में शून्य से नीचे 40 डिग्री तापमान था।
 

सितंबर माह में यह जानते हुए भी कि इस इलाके में चीनी सैनिकों ने बड़े पैमाने पर घुसपैठ की है, गिनती के जवानों को हॉट स्प्रिंग पर चौकी स्थापित करने के लिए भेज दिया। करीब 70 जवानों की दो टुकड़ियां बनाई गईं।

एक का नेतृत्व आईटीबीएफ के डीएसपी करमसिंह को सौंपा गया तो दूसरी टुकड़ी की कमान एसपी त्यागी को दी गई। तमाम मुसीबतों को झेलते हुए हमारे जवान चौकी स्थापित करने में सफल हो गए, मगर इस बीच हमारे कई साथी बर्फ में छूट गए।

मैं और मेरे दर्जनभर साथियों को पकड़ लिया गया। बाद में हम सब जवान चुशुल एयरपोर्ट के निकट रिहा कर दिए गए। मालूम हुआ कि डीएसपी करमसिंह की टुकड़ी के सात जवान बेस कैंप पर नहीं पहुंचे।

इसके बाद हम अपने लापता साथियों की तलाश में निकल पड़े। बीच राह में चीनी सैनिक छुपे बैठे थे। उन्होंने भारतीय जवानों को घेर लिया, जिसमें मैं भी शामिल था। 

पत्थर को बनाया लड़ाई का बहाना

जिस तरह से आज पैंगोंग त्सो झील के पास चीनी सैनिक खड़े हैं, उसी तरह हॉट स्प्रिंग में 1959 के दौरान चीनी फौज ने पोजिशन संभाल रखी थी। सोनम ने कहा था कि चीन की आदत सदैव धोखे वाली रही है। उसकी किसी बात पर हम भरोसा नहीं कर सकते हैं।

कई दशकों से चीन हमारी सीमा में घुसकर उसे अपना बताता रहा है। सच्चाई वह जानता है कि भारत अब 1959 या 1962 वाली स्थिति में नहीं है। भारतीय फौज उसकी किसी भी नापाक हरकत का जवाब देने का दम रखती हैं।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें