सीआरपीएफ से रिटायर्ड और हॉट स्प्रिंग मिशन के एकमात्र जीवित लद्दाखी हीरो सोनम वांग्याल (78) ने गत वर्ष लेह से अमर उजाला कॉम के साथ खास बातचीत में यह खुलासा किया था। वांग्याल ने 1965 में मात्र 25 साल की आयु में एवरेस्ट फतह की थी।
नई दिल्ली के चाणक्यपुरी इलाके में बने पुलिस मेमोरियल के अनावरण समारोह में पीएम नरेंद्र मोदी ने सोनम वांग्याल को सम्मानित किया था। वांग्याल का कहना था कि 1962 की लड़ाई से पहले चीनी सैनिकों ने 1959 में लेह-लद्दाख के कई इलाकों में जबरदस्त घुसपैठ की थी।
अक्तूबर के महीने में सोलह हजार फुट की ऊंचाई पर लद्दाख में शून्य से नीचे 40 डिग्री तापमान था।
सितंबर माह में यह जानते हुए भी कि इस इलाके में चीनी सैनिकों ने बड़े पैमाने पर घुसपैठ की है, गिनती के जवानों को हॉट स्प्रिंग पर चौकी स्थापित करने के लिए भेज दिया। करीब 70 जवानों की दो टुकड़ियां बनाई गईं।
एक का नेतृत्व आईटीबीएफ के डीएसपी करमसिंह को सौंपा गया तो दूसरी टुकड़ी की कमान एसपी त्यागी को दी गई। तमाम मुसीबतों को झेलते हुए हमारे जवान चौकी स्थापित करने में सफल हो गए, मगर इस बीच हमारे कई साथी बर्फ में छूट गए।
मैं और मेरे दर्जनभर साथियों को पकड़ लिया गया। बाद में हम सब जवान चुशुल एयरपोर्ट के निकट रिहा कर दिए गए। मालूम हुआ कि डीएसपी करमसिंह की टुकड़ी के सात जवान बेस कैंप पर नहीं पहुंचे।
इसके बाद हम अपने लापता साथियों की तलाश में निकल पड़े। बीच राह में चीनी सैनिक छुपे बैठे थे। उन्होंने भारतीय जवानों को घेर लिया, जिसमें मैं भी शामिल था।
जिस तरह से आज पैंगोंग त्सो झील के पास चीनी सैनिक खड़े हैं, उसी तरह हॉट स्प्रिंग में 1959 के दौरान चीनी फौज ने पोजिशन संभाल रखी थी। सोनम ने कहा था कि चीन की आदत सदैव धोखे वाली रही है। उसकी किसी बात पर हम भरोसा नहीं कर सकते हैं।
कई दशकों से चीन हमारी सीमा में घुसकर उसे अपना बताता रहा है। सच्चाई वह जानता है कि भारत अब 1959 या 1962 वाली स्थिति में नहीं है। भारतीय फौज उसकी किसी भी नापाक हरकत का जवाब देने का दम रखती हैं।