वित्तीय अस्थिरता के दौर में कानपुर शहर की कंपनियों का अर्थशास्त्र भी गड़बड़ा गया है। कंपनियां आयकर विभाग में समय पर अपना टैक्स जमा नहीं कर पा रही हैं। इससे शहर की कंपनियों से जमा होने वाले कारपोरेट टैक्स में गिरावट आई है। आयकर विभाग अब इस बात की पड़ताल करेगा कि यह टैक्स चोरी की वजह से हो रहा है अथवा वाकई कारोबार में गिरावट आई है।
शहर में आयकर विभाग का एक विंग ऐसा है जो सिर्फ कंपनियों और फर्मों के टैक्स पर नजर रखता है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि वित्तीय वर्ष 2018-19 में आयकर विभाग को 650 करोड़ रुपये कारपोरेट टैक्स वसूलने का लक्ष्य दिया गया है। इस वर्ष एडवांस टैक्स जमा करने की दो तिमाही बीत चुकी हैं, लेकिन बड़ी संख्या में कंपनियों की ओर से एडवांस टैक्स जमा नहीं किया गया। यही वजह रही कि अब तक सिर्फ 230 करोड़ रुपये ही टैक्स जमा हो सका है।
इसी विषय पर अमर उजाला डॉट कॉम ने पोल में अपने पाठकों से सवाल पूछा था 'समय पर टैक्स जमा करने वालों के सम्मान से प्रभावित होकर टैक्स चोरी करने वालों की संख्या में कमी आएगी?'
पोल के जवाब में हमें कुल 3,316 वोट मिले। इनमें 59.89 फीसदी (1986 वोट) पाठकों ने माना कि हां समय पर टैक्स जमा करने वालों के सम्मान से प्रभावित होकर टैक्स चोरी करने वालों की संख्या में कमी आएगी, जबकि 40.11 फीसदी (1330 वोट) पाठकों ने माना कि समय पर टैक्स जमा करने वालों के सम्मान से प्रभावित होकर टैक्स चोरी करने वालों की संख्या में कमी नहीं आएगी।