किसान शक्ति संघ शक्ति संघ के अध्यक्ष चौधरी पुष्पेंद्र सिंह कहते हैं कि किसानों की आय दोगुनी करने का दावा बहुत लुभावना है, लेकिन इसकी असलियत तब सामने आ जाती है जब सरकार किसानों के उत्पादों के न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करती है। मूल्य तय करने में A2+FL (वास्तविक खर्च+परिवार का श्रम) का तरीका अपनाया जाता है जिसमें कृषि भूमि का किराया शामिल नहीं किया जाता। अगर सरकार कृषि लागत मूल्य आयोग की सिफारिशों के मुताबिक उपज का मूल्य C2+50% तरीके से करे तो ही किसानी लाभदायक सौदा साबित होगी।
केंद्र सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1925 रुपये प्रति कुंतल निर्धारित किया है, लेकिन बाजार की सच्चाई यह है कि गेंहू को कई बार इससे भी कम कीमत पर बेचा जा रहा है। किसान खरीद केंद्रों से बाहर किसानों को यह मूल्य नहीं मिलता। सरकार को यह नियम बाध्यकारी करना चाहिए कि कृषि उत्पादों को न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे कहीं भी नहीं बेचा जा सकता। इससे किसान अनाज मंडी के दलालों के चंगुल से बच सकेंगे।
राष्ट्रीय किसान महासंघ के नेता शिव कुमार शर्मा ने अमर उजाला को बताया कि केंद्र सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1925 रुपये प्रति कुंतल निर्धारित किया है, जबकि इसकी न्यूनतम लागत 2800 रुपये के लगभग आ रही है। यानी प्रति कुंतल के हिसाब से किसान को देश के अलग-अलग क्षेत्रों में हजार रुपये प्रति कुंतल तक का नुकसान हो रहा है। अगर सरकार वास्तविक लागतों के आधार पर मूल्य निर्धारित करती तो यह मूल्य 4200 रुपये के आसपास होना चाहिए।
इसी प्रकार धान की फसल के लिए वर्ष 2019-20 में न्यूनतम समर्थन मूल्य सामान्य धान के लिए 1815 रुपये और ए ग्रेड के धान के लिए 1835 रुपये प्रति कुंतल तय किया गया था। जबकि इसकी लागत 3372 रुपये तक आई थी। इस प्रकार हर कुंतल पर किसानों को डेढ़ हजार रुपये तक का नुकसान हुआ था।
इस वर्ष कोरोना के कारण श्रमिकों की उपलब्धता बेहद कम हो गई थी। जो श्रमिक बचे, उन्होंने ज्यादा मजदूरी ली है। कई जगहों पर धान लगाने के लिए तीन से चार हजार रुपये तक का ठेका देना पड़ा है। जबकि समर्थन मूल्य तय करते समय इन बातों का ध्यान नहीं रखा जाएगा और इसकी कीमत किसानों को ही चुकानी पड़ेगी।
केंद्र सरकार ने कई कृषि उपकरणों पर जीएसटी दरें लागू कर दी हैं जिनसे कृषि उपकरणों की लागत बढ़ गई है। इसी प्रकार बिजली दरों, रसायनों और खादों पर मूल्य बढ़ गया है। इसका नुकसान यह हुआ है कि कृषि लागत बढ़ती जा रही है और इसके साथ ही कृषि घाटा भी बढ़ता जा रहा है।
क्या हो सकता है उपाय
किसानों की आय बढ़ाने के लिए उसकी लागत को कम करना सबसे प्रमुख माना जाता है। इसके लिए किसानों को कम मूल्य पर बिजली उपलब्ध कराना, डीजल-पेट्रोल कीमतें कम करना, किसी भी कृषि उत्पाद को कहीं भी बेचने पर एक न्यूनतम मूल्य निश्चित करना आवश्यक है। किसान अपने मनचाहे समय पर उत्पाद बेच सकें, इसके लिए भंडारण केंद्रों और लॉजिस्टिक्स की सुविधा को मजबूत करना चाहिए।