कर्नाटक के हुबली के ईदगाह मैदान में टीपू सुलतान की जयंती मनाने के असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम (AIMIM) ने इजाजत मांगी है। ओवैसी की पार्टी के अलावा कुछ अन्य दलित संगठनों ने भी हुबली नगर निगम से इसकी अनुमति मांगी है। इस बीच श्रीराम सेना ने भी अपने कार्यक्रम के लिए ईदगाह मैदान मांगा है।
कुछ दलित संगठनों और ओवैसी की पार्टी ने ईदगाह मैदान में टीपू सुलतान की जयंती का कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है। इसलिए इन्होंने हुबली नगर निगम आयुक्त को आवेदन दिया है। इसके तत्काल बाद श्री राम सेना मैदान में कूद गई और उसने 'कनकदास जयंती' मनाने के लिए ईदगाह मैदान मांग लिया। उसने भी मैदान में कार्यक्रम की इजाजत मांगी है।
हुबली के मेयर ने कही यह बात
उधर, हुबली के मेयर वीरेश अंचटगेरी ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि ईदगाह मैदान में धार्मिक गतिविधियां की जा सकती हैं, लेकिन किसी बड़े नेता को अनुमति नहीं दी जाएगी।
मेयर व सीएम करेंगे विचार : गृह मंत्री ज्ञानेंद्र
इस बीच, कर्नाटक के गृह मंत्री अरगा ज्ञानेंद्र ने कहा कि यह एक ऐसा मामला है, जो हुबली धारवाड़ महानगर पालिका से संबंधित है। मेयर और कर्नाटक के मुख्यमंत्री इस पर विचार करेंगे।
गणेश चतुर्थी कार्यक्रम का मामला हाईकोर्ट पहुंचा था
इससे पहले अगस्त में कर्नाटक हाईकोर्ट ने हुबली के ईदगाह मैदान में गणेश चतुर्थी कार्यक्रमों की अनुमति दी थी। अंजुमन-ए-इस्लाम द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने आदेश में कहा था कि ईदगाह की जमीन हुबली-धारवाड़ नगर निगम की संपत्ति है। आयोग जिसे चाहें जमीन आवंटित कर सकते हैं। बाद में कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ मामला सुप्रीम कोर्ट गया था। इस बीच, मैदान को गणेश चतुर्थी समारोह के लिए दिया गया था। यह पहला मौका था जब इस मैदान में हिंदू त्योहार मनाया गया था।
2010 में हुबली ईदगाह मैदान को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा था
हुबली का ईदगाह मैदान दशकों तक विवादों में रहा है। 2010 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि यह मैदान हुबली धारवाड़ नगर निगम की संपत्ति है। इससे पूर्व 1921 में यह मैदान इस्लामी संगठन अंजुमन- ए-इस्लाम को 999 साल की लीज पर दिया गया था।