भारतीय मौसम विभाग अगले मानसून काल से मलेरिया को लेकर भी पूर्वानुमान जारी करना शुरू करेगा। केंद्रीय पृथ्वी व विज्ञान मंत्रालय के सचिव एम. राजीवन ने शनिवार को यह यह जानकारी दी।
इंडियन एकेडमी आफ साइंसेस द्वारा आयोजित एक व्याख्यान में उन्होंने यह बात कही। व्याख्यान का विषय था 'रिसेंट एडवांसेस इन वेदर एंड क्लाइमेट प्रिडिक्शंस'। राजीवन ने कहा कि भारत जल्द ही मौसम पूर्वानुमान के लिए और अत्याधुनिक कंप्यूटरों का इस्तेमाल करेगा। इनसे मौसम का और सटीक भविष्यवाणी की जा सकेगी। अभी भारत का स्थान अमेरिका, ब्रिटेन व जापान के बाद आता है। इसी सप्ताह मंत्रालय द्वारा जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने राष्ट्रीय मानसून मिशन पर 990 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
मौसम व मलेरिया का संबंध
कार्यक्रम के बाद पीटीआई से चर्चा में राजीवन ने कहा कि रोगाणु जनित बीमारियों के पूर्वानुमान को लेकर कहा कि मौसम विभाग ने एक अध्ययन में पाया है कि बारिश, तापमान व मलेरिया का संबंध है। विभाग ने नागपुर से प्राप्त मलेरिया के डेटा के आधार पर अध्ययन किया। ऐसे ही डेटा अन्य जगहों से भी मंगाकर अध्ययन किया जा सकता है। इनके आधार पर मलेरिया के बड़े पैमाने पर होने का पूर्वानुमान जताया जा सकता है। यही तरीका मानसून जनित अन्य रोगों जैसे डेंगू व हैजे को लेकर भी अपनाया जा सकता है। उन्होंने आईएमडी अगले मानसून से मलेरिया को लेकर पूर्वानुमान जारी करेगा।