स्वास्थ्य केंद्रों से रिलीव हो चुके कई एमबीबीएस डॉक्टरों को दोबारा वहीं सेवाएं देने के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।
आयुष डॉक्टरों के संगठन इंटिग्रेटिड मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने प्रस्तावित राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयोग का गठन लोकतांत्रिक पद्धति से करने की मांग की है। आयुष चिकित्सकों को 20 सप्ताह तक का गर्भपात करने की अनुमति दी जाए।
संसदीय समिति को भेजे सुझाव में एसोसिएशन ने आयुष डॉक्टरों के अधिकारों को लेकर कई तरह के सुझाव दिए हैं, जिनमें गर्भपात का अधिकार मिलना मुख्य है। दरअसल राज्यसभा के पिछले सत्र में राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयोग विधेयक को जांच के लिए संसदीय स्थायी समिति भेजा है। समिति ने संबंधित पक्षों से आपत्तियां व सुझाव आमंत्रित किए हैं।
अभी तक भारतीय चिकित्सा पद्धतियों का नियमन केन्द्रीय भारतीय चिकित्सा परिषद अधिनियम 1970 के अंतर्गत होता है। लेकिन नए विधेयक के बाद राज्य सरकारों को आयुष डॉक्टरों को एलोपैथी प्रैक्टिस करने की मंजूरी देने का अधिकार भी मिल जाएगा।
एसोसिएशन के राष्ट्रीय महासचिव डॉ आर. पी. पाराशर ने एलोपैथिक दवाओं के प्रयोग से संबंधित अधिकार को प्रस्तुत विधेयक में सम्मिलित करने के निर्णय पर प्रसन्नता जताते हुए सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। डॉ पाराशर ने आयोग के तहत आयुर्वेद के लिए अलग बोर्ड के गठन पर भी खुशी जताते हुए कहा कि अभी अप्रशिक्षित व्यक्तियों द्वारा गर्भपात करने के कारण देश में हर दो घंटे में एक महिला की मौत हो रही है।
जनसंख्या परिषद द्वारा 2012 में जारी रिपोर्ट के अनुसार आयुष चिकित्सक भी एलोपैथिक चिकित्सकों की तरह प्रभावी और सुरक्षित गर्भपात कराने में सक्षम हैं। एसोसिएशन ने मांग की है कि असुरक्षित गर्भपात के कारण होने वाली मौतों को रोकने के लिए आयुष चिकित्सकों को 20 सप्ताह तक गर्भपात करने की अनुमति दी जाए। सभी राष्ट्रीय स्वास्थ्य रक्षा कार्यक्रमों में आयुष चिकित्सकों को सम्मिलित करने का सुझाव भी एसोसिएशन द्वारा दिया गया है।