इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने कहा है कि केंद्र सरकार की आयुष्मान योजना बुरी तरह असफल साबित हुई है। इस योजना ने गरीबों का स्वास्थ्य ठीक करने की बजाय अस्पतालों को बीमार बना दिया है। इस योजना के तहत इलाज करने के कारण सरकार को अस्पतालों को सैकड़ों-हजारों करोड़ रुपयों का भुगतान अस्पतालों को करना है। लेकिन इनका भुगतान न किए जाने के कारण अस्पताल बंद होने के कगार पर आ गए हैं। सरकार को स्वास्थ्य क्षेत्र में अपनी असफलता को छिपाने की बजाय अस्पतालों को उनके बकाए का भुगतान करना चाहिए।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के अध्यक्ष राजन शर्मा ने गुरुवार को कहा कि केंद्र सरकार आयुष्मान योजना को गलत तरीके से लागू करने की कोशिश कर रही है जिसकी वजह से इसमें सफलता नहीं मिल रही है। केंद्र सरकार ने पूरी तैयारी के बिना आयुष्मान योजना लागू की जबकि उसके पास जरूरी ढांचा उपलब्ध नहीं है। प्राइवेट अस्पतालों को इस योजना में लागू करने के समय अस्पतालों को एक न्यूनतम भुगतान देने की बात कही गई, लेकिन इस राशि का भी समय से भुगतान नहीं किया जा रहा है।
इसका परिणाम हुआ है कि बड़े प्राइवेट अस्पताल या तो आयुष्मान मरीजों को लेने से इनकार कर रहे हैं या बंदी के कगार पर आ गए हैं। केंद्र सरकार पर इन अस्पतालों का करोड़ों रुपये बकाया है जिनके तुरंत भुगतान के बिना इन अस्पतालों को चलाना संभव नहीं रह गया है। ऐसे में सरकार को अपनी नाकामियों से निबटने की कोशिश करनी चाहिए, न कि उसे दूसरों पर आरोप थोपना चाहिए।
सरकार तय करे जरूरी दवाओं के दाम
राजन शर्मा ने कहा कि आम धारणा है कि दवाओं के दाम कंपनियों के द्वारा बेतरतीब ढंग से बढ़ाए जाते हैं और दवा की बिक्री के लिए डॉक्टरों को बेजा सेवाएं पेश की जाती हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को इस व्यवस्था से देश को निकालने के लिए सभी दवाओं के दाम तय कर देना चाहिए। सरकार एक प्रक्रिया निर्धारित कर सभी दवाओं की लागत और आवश्यक मुनाफा तय कर देना चाहिए।
इस पर भी हुआ विवाद
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन फार्मा कंपनियों पर गलत आचरण संबंधी कथित बयान को लेकर पीएमओ से भी नाराज है और इसपर विवाद हो रहा है। इस बयान पर 14 जनवरी को एक पत्र जारी करते हुए आईएमए ने सफाई मांगी है। राजन शर्मा ने कहा कि अगर मीडिया में छपी यह खबर गलत है तो प्रधानमंत्री कार्यालय को इसका खंडन करना चाहिए, लेकिन अगर यह बात सही है तो इस बयान के लिए खेद व्यक्त करना चाहिए।