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परमाणु हथियारों की तस्करी, करोड़ों डॉलर का है ये काला कारोबार

Sun, 03 Apr 2016 06:42 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
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परमाणु सुरक्षा को लेकर अमेरिका के वाशिंगटन में हुई प्रमुख देशों की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा ने परमाणु हथियारों पर चिंता व्यक्त की। हालांकि यह पूरी दुनिया को पता है कि सबसे ज्यादा मात्रा में परमाणु हथियार जमा करने वाले देशों में अमेरिका और रूस सबसे आगे हैं।
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लेकिन सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि परमाणु हथियारों का काला कारोबार भी दुनिया में चल रहा है। आशंका है कि इसका फायदा उठाकर सबसे खतरनाक आतंकी संगठन आईएस के हाथ कहीं परमाणु हथियार न लग जाएं।

परमाणु हथियारों को लेकर प्रकाशित हुई 2013 की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि दुनिया के सभी देशों में मौजूद परमाणु हथियारों की संख्या 17,625 है। लेकिन इससे भी ज्यादा चिंता की बात यह है कि परमाणु हथियारों की तस्करी भी हो रही है। इस काले कारोबार का पूरा बाजार भी है। आगे पढ़ें परमाणु हथियार तस्करी का पूरा ब्यौरा।
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100 मिलियन डॉलर का है काला बाजार

हैवोस्कोप की रिपोर्ट के अनुसार, परमाणु हथियार तस्करी का बाजार 100 मिलियन डॉलर यानी 10 करोड़ डॉलर का है। परमाणु हथियारों की तस्करी पर रिपोर्ट खुफिया एजेंसियों की रिपोर्टों और चेतावनी के आधार पर बनाई गई है।

2010 और नवंबर 2012 के बीच में अमेरिकी न्याय विभाग के वकीलों ने परमाणु हथियारों का अवैध कारोबार को लेकर ईरान के खिलाफ 8 मामले दर्ज कराए थे। वकीलों का कहना था कि और केस भी परमाणु हथियार तस्करी के तहत दर्ज किए गए हैं लेकिन मामलों की जांच जारी होने से उन्हें सार्वजनिक नहीं किया गया।

अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, ईरान को अवैध तरीके से मिसाइल गाइडेंस सिस्टम, रेडियो जैमर्स और परमाणु हथियारों में इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री भेजा गया था।

लॉस एजेंल्स टाइम्स में प्रकाशित एक रिपोर्ट के आधार पर कहा गया है कि अमेरिका से अवैध तरीके ईरान को भेजे जाने वाल परमाणु सामग्री में वृद्िध हुई है। इतना ही नहीं एक स्टिंग ऑपरेशन में परमाणु हथियारों की कीमत का भी पता चला है।

क्या है परमाणु सामग्री की बाजार में कीमत?

मालदोवा में एक परमाणु तस्करी करने वाले एक गैंग से स्टिंग कर रहे कुछ पुलिस अध‌िकारियों को यूरेनियम बेचने की पेशकस की थी जिसमें यूरेनियम की कीमत नौ किलो यूरेनियम की कीमत 31 मिलियन डॉलर यानी दो अरब पांच करोड़ 32 लाख रुपए बताई थी।

गौरतलब है कि एक घातक परमाणु बम बनाने के लिए 27 किलो यूरेनियम की जरूरत होती है। और अगर कोई आतंकी संगठन 27 किलो यूरेनियम खरीद लेता है तो वह परमाणु बम बना सकता है जो विनाशक होगा।

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, 1995 से 2012 के बीच परमाणु हथियार तस्करी के 2200 प्रयास किए गए जो अपने आम में परमाणु हथियारों की तस्करी के पुख्ता सबूत हैं।
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यूरोपीय देशों में होती है सबसे ज्यादा तस्करी

रिपोर्ट के ‌अनुसार, केंद्रीय और पूर्वी यूरोपीय देशों में सबसे ज्यादा परमाणु हथियारों की तस्करी की जाती है। परमाणु हथियारों की तस्करी सबसे मामले ज्यादा पूर्व सोवियत यूनियन और पूर्वी यूरोपी देशों से सामने आए हैं।

2003, 2006 और 2010 में जॉर्जिया में उच्च श्रेणी के यूरेनियम की तस्करी के मामले सामने आए चुके हैं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिका इस अवैध तस्करी को रोकने के लिए हर साल दो बिलियन डॉलर खर्च करता है। तस्करी के काले बाजार को काबू करने ये धन खर्च होता है।

वहीं रिपोर्ट में सबसे अहम बात यह भी कही गई है कि दुनिया में मौजूद यूरेनियम सबसे उच्च श्रेणी का रूस के पास है। शायद यही कारण है कि परमाणु हथियारों की उपलब्‍धता में रूप दुनिया में नंबर वन है।
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