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Maharashtra: अवैध होर्डिंग-बैनर को बॉम्बे हाईकोर्ट ने बताया भयावह और स्थिति दुखद, राजनीतिक दलों को नोटिस जारी

Thu, 19 Dec 2024 05:45 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

Illegal Hoardings-Banners: महाराष्ट्र में अंधाधुंध तरीके से लगे अवैध होर्डिंग और बैनर को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने टिप्पणी की है। हाईकोर्ट ने इसे भयावह और दुखद स्थिति बताया है। इसके साथ ही इस मामले में राज्य की सभी राजनीतिक पार्टियों को नोटिस भी जारी किया गया है।
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बॉम्बे हाई कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार को महाराष्ट्र में अवैध होर्डिंग और बैनर की बढ़ती संख्या को 'भयावह' और 'दुखद स्थिति' करार दिया। मामले में मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति अमित बोरकर की खंडपीठ ने सभी राजनीतिक दलों को नोटिस जारी कर उन्हें कारण बताने का निर्देश दिया कि अदालत के आदेशों की अवहेलना करने के लिए उनके खिलाफ अवमानना कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए।
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'अवैध बैनर और होर्डिंग के खिलाफ हो सख्त कार्रवाई'
पिछले कई वर्षों से, हाईकोर्ट अवैध बैनर और होर्डिंग के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आह्वान कर रहा है और सभी राजनीतिक दलों को यह आश्वासन देने का भी आदेश दिया है कि उनके कार्यकर्ता ऐसे होर्डिंग नहीं लगाएंगे। सभी राजनीतिक दलों- भाजपा, कांग्रेस, शिवसेना, एनसीपी और मनसे- ने तब एक वचनबद्धता प्रस्तुत की थी।

राजनीतिक दलों को कारण बताओ नोटिस जारी
मामले में हाई कोर्ट ने कहा, अदालत ने अपने पहले के आदेशों में राजनीतिक दलों की तरफ से दिए गए वचनों को रिकॉर्ड में लिया था। हालांकि, ऐसा प्रतीत होता है कि ये राजनीतिक दल इस पर खरे नहीं उतरे हैं। पीठ ने कहा, 'हम उन्हें (राजनीतिक दलों को) कारण बताने के लिए नोटिस जारी करते हैं कि 2017 में पारित फैसले की अवहेलना के लिए उनके खिलाफ न्यायालय की अवमानना अधिनियम के प्रावधानों के तहत उचित कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए।'
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'चुनाव के बाद राज्य में बढ़ी होर्डिंग, बैनर की संख्या'
पीठ ने कहा कि चुनाव के बाद राज्य भर में अनधिकृत होर्डिंग, बैनर और पोस्टर की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। 'इससे अधिक भयावह क्या हो सकता है? हमारे (2017 के) फैसले में अवैध होर्डिंग के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश देने के बावजूद, देखिए हम कहां जा रहे हैं। यह बहुत दुखद स्थिति है।' इस दौरान पीठ ने सवाल किया कि ऐसे मामलों में आदेश और निर्णय की आवश्यकता क्यों है, जबकि कानून के तहत सरकार और नागरिक निकायों पर कर्तव्य है। 

'इतना बाध्य न करें, कि हमें सख्त कार्रवाई करनी पड़े'
पीठ ने अधिकारियों को भी चेतावनी दी और कहा कि, 'न्यायालय को इतना बाध्य न करें, जहां हमें सख्त कार्रवाई करनी पड़े। हम आपको (नागरिक निकायों को) सावधान कर रहे हैं।' न्यायालय ने कहा कि वह नगर निकाय प्रमुखों के खिलाफ अवमानना कार्रवाई शुरू करने के लिए नोटिस जारी करने के लिए बाध्य होगा। न्यायालय ने कहा कि वह अनधिकृत होर्डिंग, बैनर और पोस्टर हटाने के लिए सरकार और नगर निकाय अधिकारियों की तरफ से किए जा रहे प्रयासों से अवगत है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है।

'चुनाव के बाद करीब 22,000 अनधिकृत होर्डिंग हटाए गए'
न्यायालय ने कहा, 'उन्हें लगाने की अनुमति क्यों दी जा रही है? आप कहते हैं कि प्रयास किए जा रहे हैं। हम इस पर सवाल नहीं उठा रहे हैं, लेकिन वे स्पष्ट रूप से अपर्याप्त हैं।' जबकि नगर निकाय अवैध होर्डिंग हटाने के लिए कर्मचारियों और बुनियादी ढांचे को तैनात करने पर खर्च कर रहे हैं, ऐसे होर्डिंग, बैनर और पोस्टर लगाने वाले लोग अपने जीवन का आनंद ले रहे हैं। इस सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता बीरेंद्र सराफ ने न्यायालय को बताया कि चुनाव के बाद करीब 22,000 अनधिकृत होर्डिंग हटाए गए। हालांकि, पीठ ने कहा कि यह संख्या नगण्य है, क्योंकि ऐसे अवैध होर्डिंग की कुल संख्या ज्ञात नहीं है।

न्यायालय ने मामले में याचिकाकर्ताओं की तरफ से प्रस्तुत कुछ तस्वीरों का अवलोकन किया, जिसमें उच्च न्यायालय भवन और शहर के सिविल न्यायालय के बाहर अनधिकृत होर्डिंग लगाए गए हैं। पीठ ने कहा कि राजनीतिक दलों की तरफ से प्रस्तुत किए गए हलफनामों के बावजूद, अवैध होर्डिंग्स, बैनर और पोस्टरों की संख्या में कमी नहीं आई है। 'इसके बजाय ऐसा लगता है कि इसमें वृद्धि हुई है।' अदालत ने कहा कि सरकार सभी नागरिक अधिकारियों को अदालत के आदेशों का पालन करने के लिए बाध्य करने के अधिकार से वंचित नहीं है। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 27 जनवरी को तय की है।
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