यह तो बात उन मसाज पार्लर या स्पा की थी, जहां आड़ में धंधा चलता है। लेकिन पार्लर की कमी नहीं है, जहां विज्ञापन मसाज और स्पा का होता है, लेकिन धंधा खुलेआम देह व्यापार का होता है। इस धंधे में भी तीन उसूल हैं। पहला, बात फोन पर होने के बाद संवाद व्हाट्सएप से होगा। व्हाट्सएप से रेट तय होगा। व्हाट्सएप पर फोटो आएगी। पसंद कीजिए। इसके बाद आस-पास का एक लैंड मार्क बताया जाएगा। वहां पहुंचने पर एक एजेंट मिलेगा। जिसका काम आंखो से ही आपकी वैरीफिकेशन कर लेना होगा। यह एजेंट मुख्यत: कैरियर है। इसे केवल इसी काम के लिए रखा जाता है और हर एक व्यक्ति को अड्डे पर पहुंचाने की इसकी फीस होती है। जो इसे वहां से मिल जाती है।
कौन है इनका टारगेट
मसाज पार्लर से लेकर मसाज पार्लर के नाम पर चलने वाले दूसरे तरह के पार्लर तक में टारगेट युवा रहता है। युवाओं में भी कामगार लोग, छोटे-छोटे शहरों से आए मजदूर, स्कूल के लड़के और कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र। यहां हर तरह की सहूलियत मिलती है। इसके बाद वाला मसाज पार्लर मध्यम आयवर्ग वालों को ध्यान में रखकर चलता है। फाइव स्टार और सेवन स्टार मसाज पार्लर, सप्लायर भी हैं। कुछ मसाज पार्लर बाकायदा फार्म हाउस और कोठी, फाइव स्टार होटल में विशेष सुविधा उपलब्ध कराते हैं। रेव पार्टी के आयोजन से लेकर अन्य। बस नोट की खनक से इनका धंधा पैना होता जाता है।
पुलिस है, सब जानती है
मसाज पार्लरों से मिली जानकारी के अनुसार धंधा है, बिना पैसे के नहीं चलता। हफ्ता बंटता है और धंधा चलता है। लाइसेंस लेने से लेकर हर मोड़ पर पैसे का कोई जवाब नहीं है ये हर काम आसान कर देता है। मनोरंजन अफसर से लेकर पुलिस विभाग तक पैसे, सुख दोनों लेता है। धौंस भी जमाता है। एक मसाज पार्लर मालकिन का कहना है कि आप बीट कांस्टेबल से नहीं बच सकते। वह गिद्ध की तरह निगाह लगाए रखता है। वह आता नहीं है, उसके पास हफ्ता भिजवाना पड़ता है। जब चाहता है तब उसके लिए भी इंतजाम भी करना पड़ता है। कुछ भी छिपा नहीं है, बस धंधा ढंका हुआ है। इसी तरह से चलता है।