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दिल्ली-एनसीआर में चल रहे मसाज पार्लर का सच, होता है खास तरह के कोड वर्ड का इस्तेमाल

Sat, 07 Sep 2019 08:34 PM IST
आसिम खान डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर
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पतिता उद्धारसभा के खैराती लाल भोला कहा करते थे कि दिल्ली में जीबी रोड पर नाच-गाने से लेकर अन्य धंधे बंद करवा दीजिएगा तो यह धंधा आपके घर के बगल में खुल जाएगा। भोला नहीं रहे, लेकिन भोला की बात चरितार्थ होती दिखाई दे रही है। दिल्ली और एनसीआर में हजारों मसाज पार्लर खुल गए हैं। इक्का-दुक्का छोड़कर बाकी सब में पार्लर की आड़ में सबकुछ चलता है। पार्लर चलाने वाले लोग, एजेंट, लड़कियां सबका अपना कोडवर्ड है। सुविधा भी जेब में पड़ी नोटों की संख्या के अनुसार है।

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कोड वर्ड : स्टाफ कोआपरेटिव है

मसाज पार्लर को खोजने के लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं है। अपने स्मार्ट फोन पर गूगल सर्च इंजन खोलिए और स्पा सेंटर डालिए। जस्ट डायल जैसे वेब विकल्प में आएंगे। इस पेज पर क्लिक करते ही आपके आस-पास के दर्जनों मसाज पार्लर का नाम, पता, फोन नंबर आ जाएगा। फोन का भी विकल्प रहेगा। क्लिक करते ही सीधा नंबर मसाज पार्लर में लगेगा। वहां आपको थाई, डीप टिश्यू, टर्किश मसाज समेत कई ऑप्शन बताए जाएंगे। नार्थ इंडियन, विदेशी, नार्थ-ईस्ट की गर्ल्स का प्रलोभन भी रहेगा। बस थोड़ी देर फोन पर टिके रहिए तो एक कोड संदेश आपके कान में सुनाई पड़ेगा-सर, फोन पर ज्यादा बात नहीं कर सकते। आ जाइए....स्टाफ कोआपरेटिव है।

मसाज पार्लर गए तो क्या मिला?

मसाज पार्लर पहुंचने पर आपको शांति का संदेश देने वाले महात्मा बुद्ध की प्रतिमा मिलेगी। पोस्टर भी रहेगा। बहुतायत मसाज पार्लर में यही देखने को मिला। रिशेप्सन पर एक स्टाफ और स्टाफ सामने मेनू रख देगा। मेनू के साथ ही उसकी नजर भी आपका आकलन करती रहेगी। यही फिर आपको कोआपरेटिव स्टाफ का संदेश सुनाएगा। यहां मसाज का पैसा दीजिए और आगे बढि़ए। 
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छोटा सा केबिन और सामने खुद को फिजियो थिरैपिस्ट कहने वाले लाल, पीले रंग में सजी गर्ल। कुछ देर मसाज का नाटक और इसके बाद पैसे का दूसरे दौर मोल-भाव। यह हाल आनंद विहार बस अड्डे के आस-पास, राधू पैलेस के पास वी3-एस मॉल के आसपास समेत यमुना पार के करीब 95 फीसदी मसाज पार्लरों में है। धंधा गंदा है तो इसे चलाने में उसके संचालकों द्वारा उतनी ही सावधानी भी बरती जाती है।

दिल्ली का दिल कहे जाने वाले क्नॉट प्लेस में भी है

ऐसा मसाज पार्लर दिल्ली का दिल कहे जाने वाले क्नॉटप्लेस, पंजाबी बाग, उत्तम नगर, दरियागंज, राम लीला मैदान, करोल बाग, पूसा रोड, पटेल नगर, आनंद पर्वत, पीतमपुरा, रोहिणी, से लेकर साऊथ एक्स तक में चलता है। कई मसाज पार्लर दिल्ली पुलिस के पीकेट या मौजूदगी वाले स्थान के बिल्कुल करीब चलते हैं। कुछ मसाज पार्लर इतने पॉश क्षेत्र में चल रहे हैं, जहां इसकी आड़ में ऐसे धंधे का विश्वास करना मुश्किल होता है।

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कुछ में तो खुलेआम होता है देहव्यापार का ऑफर

यह तो बात उन मसाज पार्लर या स्पा की थी, जहां आड़ में धंधा चलता है। लेकिन पार्लर की कमी नहीं है, जहां विज्ञापन मसाज और स्पा का होता है, लेकिन धंधा खुलेआम देह व्यापार का होता है। इस धंधे में भी तीन उसूल हैं। पहला, बात फोन पर होने के बाद संवाद व्हाट्सएप से होगा। व्हाट्सएप से रेट तय होगा। व्हाट्सएप पर फोटो आएगी। पसंद कीजिए। इसके बाद आस-पास का एक लैंड मार्क बताया जाएगा। वहां पहुंचने पर एक एजेंट मिलेगा। जिसका काम आंखो से ही आपकी वैरीफिकेशन कर लेना होगा। यह एजेंट मुख्यत: कैरियर है। इसे केवल इसी काम के लिए रखा जाता है और हर एक व्यक्ति को अड्डे पर पहुंचाने की इसकी फीस होती है। जो इसे वहां से मिल जाती है।

कौन है इनका टारगेट

मसाज पार्लर से लेकर मसाज पार्लर के नाम पर चलने वाले दूसरे तरह के पार्लर तक में टारगेट युवा रहता है। युवाओं में भी कामगार लोग, छोटे-छोटे शहरों से आए मजदूर, स्कूल के लड़के और कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र। यहां हर तरह की सहूलियत मिलती है। इसके बाद वाला मसाज पार्लर मध्यम आयवर्ग वालों को ध्यान में रखकर चलता है। फाइव स्टार और सेवन स्टार मसाज पार्लर, सप्लायर भी हैं। कुछ मसाज पार्लर बाकायदा फार्म हाउस और कोठी, फाइव स्टार होटल में विशेष सुविधा उपलब्ध कराते हैं। रेव पार्टी के आयोजन से लेकर अन्य। बस नोट की खनक से इनका धंधा पैना होता जाता है।

पुलिस है, सब जानती है

मसाज पार्लरों से मिली जानकारी के अनुसार धंधा है, बिना पैसे के नहीं चलता। हफ्ता बंटता है और धंधा चलता है। लाइसेंस लेने से लेकर हर मोड़ पर पैसे का कोई जवाब नहीं है ये हर काम आसान कर देता है। मनोरंजन अफसर से लेकर पुलिस विभाग तक पैसे, सुख दोनों लेता है। धौंस भी जमाता है। एक मसाज पार्लर मालकिन का कहना है कि आप बीट कांस्टेबल से नहीं बच सकते। वह गिद्ध की तरह निगाह लगाए रखता है। वह आता नहीं है, उसके पास हफ्ता भिजवाना पड़ता है। जब चाहता है तब उसके लिए भी इंतजाम भी करना पड़ता है। कुछ भी छिपा नहीं है, बस धंधा ढंका हुआ है। इसी तरह से चलता है।
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