आईआईटी अब सरकार के रहमों-करम पर नहीं रहेगी। आईआईटी अपने पूर्व छात्रों से एल्यूमनाई फंड के रूप में पैसे लेगी। इसी पैसे को इंडाउमेंट योजना के तहत बैंक में जमा किया जाएगा। बैंक में जमा पैसे से मिलने वाले ब्याज से आईआईटी अपने खर्चें पूरे करेगी। इस योजना को इंडाउमेंट का नाम दिया गया है। आईआईटी दिल्ली ने इस योजना में 2025 तक सात हजार करोड़ रुपये जमा करने का लक्ष्य रखा है।
राष्ट्रपति इसी हफ्ते आईआईटी दिल्ली से इंडाउमेंट योजना को शुरू करेंगे
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद इसी हफ्ते आईआईटी दिल्ली से इंडाउमेंट योजना को शुरू करेंगे। इसके बाद देश के अन्य दिग्गज व पुराने आईआईटी भी जुड़ेंगे। आईआईटी दिल्ली के पास फिलहाल डेढ़ सौ करोड़ रुपये का फंड है। इसी फंड को इंडाउमेंट योजना में जोड़ा जाएगा। योजना शुरू होने के बाद आईआईटी दिल्ली अपने एल्यूमनाई से पैसा देने की मांग रखेगा। पिछले महीने आईआईटी काउंसिल बैठक में एल्यूमनाई को कुल आय का एक फीसदी अपने आईआईटी को देने का प्रस्ताव भी पास हुआ है। यह प्रस्ताव सरकार की ओर से दिया गया था, जिसे आईआईटी ने मान लिया है।
एल्यूमनाई बोर्ड रखेगा निगरानी
आईआईटी को एल्यूमनाई से इंडाउमेंट योजना के तहत मिलने वाले फंड की निगरानी व खर्चे का हिसाब-किबाब एल्यूमनाई बोर्ड करेगा। इस बोर्ड में एल्यूमनाई और आईआईटी दोनों के सदस्य शामिल होंगे। एल्यूमनाई बोर्ड पैसे को कैसे और कहां खर्च करना है पर भी अपनी राय दे सकता है।
एक हजार करोड़ जमा होने तक ब्याज के पैसे नहीं निकलेंगे
अभी तक पूर्व छात्रों (एल्यूमनाई) स्कॉलरशिप, चेयर, डिपार्टमेंट या इंफ्रास्ट्रक्चर के नाम पर पैसे देते थे। इन योजनाओं के नाम पर दिए पैसे का आईआईटी अपनी मर्जी से प्रयोग नहीं कर सकता था। हालांकि इंडाउमेंट योजना में एकमुश्त एल्यूमनाई आईआईटी को पैसा देंगे। इसमें आईआईटी अपनी मर्जी से पैसा खर्च कर सकेगा। एक हजार करोड़ रुपये बैंक में जमा होने के बाद ही उसका ब्याज का पैसा खर्च किया जाएगा।