आईआईटी में जल्द ही छात्राओं के प्रवेश के लिए स्पेशल कोटा होगा। आईआईटी परिषद ने इस बाबत शुक्रवार को मुंबई में एक बैठक की। बैठक में छात्राओं की संख्या बढ़ाने पर चर्चा हुई कि मौजूदा समय में आईआईटी में सालाना 8 से 9 फीसदी महिलाएं प्रवेश पाती हैं जिसको 2020 तक बढ़ाकर 20 फीसदी तक ले जाना है।
मानव संसाधन विकास (एचआरडी) मंत्री प्रकाश जावेड़कर ने कहा कि अधिक लड़कियों को एडमिशन मिल पाए इसको मद्देनजर रखते हुए यह फैसला लिया गया है। सूत्रों के मुताबिक अतिरिक्त सीटों के लिए अलग-अलग कोर्स चलाया जाएगा, जिससे आईआईटी में अधिक लड़कियों को प्रवेश मिल सकेगा। उदाहरण के तौर पर अगर आईआईटी-बॉम्बे के कम्प्यूटर साइंस प्रोग्राम में 60 सीटें हैं, तो इसमें लड़कियों के लिए एक या दो सीटों की बढ़ोतरी होगी।
आईआईटी काउंसिल की स्थायी समिति के अध्यक्ष अशोक मिश्रा ने कहा कि विविधता बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि हम जानते हैं कि अन्य इंजीनियरिंग कॉलेजों के परिसरों में लगभग 40-50% लड़कियां हैं, हालांकि आईआईटी में ऐसा नहीं हैं। उन्होंने आगे कहा कि हम जानते हैं कि हमारी जेईई इस मामले में सक्षम हैं और हम अधिक छात्राओं को आईआईटी में एडमिशन देना चाहते हैं।
वर्तमान में एलिट इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश पाने के लिए हर साल आयोजित होने वाली जेईई (एडवांस) की परीक्षा में 4,500 लड़कियां शामिल होती हैं जिनमें से मात्र 800 लड़कियां जेईई परीक्षा पास कर आईआईटी में प्रवेश पाती हैं।
एकेडमिक सेशन 2017-18 में देश के 31 आईआईटी में छात्राओं की तादाद बढ़ जाएगी। आईआईटी में छात्र-छात्राओं का अनुपात सही करने के लिए नए एकेडमिक सेशन में बीटेक प्रोग्राम में लड़कियों को स्पेशल कोटे के तहत दाखिला मिलने लगेगा। ज्वाइंट एडमिशन बोर्ड (जैब) ने लड़कियों को आगे बढ़ाने के मकसद से सुपर न्यूमररी कोटा के तहत बीस फीसदी अतिरिक्त सीटों पर लड़कियों को दाखिला देने का फैसला किया। लड़कियों को बेशक दाखिले में स्पेशल कोटा लागू होने का लाभ मिलेगा, लेकिन उससे लड़कों की सीट पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।