आईआईटी मद्रास ने मानव मस्तिष्क के ब्रेनस्टेम का अब तक का सबसे विस्तृत 3डी डिजिटल एटलस 'एंकर' विकसित किया है, जो कोशिका स्तर तक संरचना और कार्यप्रणाली को समझने में मदद करेगा। पढ़िए रिपोर्ट-
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आईआईटी मद्रास) ने मानव मस्तिष्क के अध्ययन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर (एसजीबीसी) ने ‘एंकर’ नामक एक उच्च-रिजॉल्यूशन 3डी ब्रेनस्टेम एटलस विकसित किया है, जिसे संस्थान मानव ब्रेनस्टेम का अब तक का सबसे विस्तृत डिजिटल मानचित्र बता रहा है।
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आईआईटी मद्रास द्वारा जारी जानकारी के अनुसार यह एटलस मस्तिष्क की संरचनाओं को कोशिका स्तर तक दर्शाता है और मस्तिष्क के विकास और उसकी कार्यप्रणाली को समझने के लिए एक नया वैज्ञानिक संसाधन उपलब्ध कराता है।
एंकर अर्थात एटलस ऑफ न्यूरोकेमिकल कैरेक्टराइजेशन ऑफ द ह्यूमन ब्रेनस्टेम विद 3डी रिकंस्ट्रक्शन में गर्भावस्था के दौरान विकसित हो रहे मस्तिष्क से लेकर बच्चों और वयस्कों तक के ब्रेनस्टेम की संरचनात्मक जानकारी शामिल की गई है। यह एटलस त्रि-आयामी स्वरूप में मस्तिष्क के उस हिस्से को समझने में मदद करता है जो सांस लेने, हृदय की धड़कन, रक्तचाप और नींद जैसी जीवनरक्षक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है। इस परियोजना के तहत 500 से अधिक मस्तिष्कीय सेक्शनों का अध्ययन किया गया और ब्रेनस्टेम की 200 से अधिक संरचनाओं, नाभिकों तथा तंत्रिका तंतुओं का मानचित्रण तैयार किया गया। शोधकर्ताओं ने आठ पूरक इम्यूनोस्टेन तकनीकों का उपयोग कर विभिन्न न्यूरोकेमिकल कोशिका प्रकारों की पहचान की और उन्हें एकीकृत करते हुए अत्यंत सूक्ष्म स्तर की संरचनात्मक जानकारी तैयार की।
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वैश्विक शोध समुदाय के लिए खुला मंच
आईआईटी मद्रास ने इस एटलस और उससे जुड़े डेटा को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया है। शोधकर्ता, चिकित्सक और विद्यार्थी इसे एंकर. ह्यूमन ब्रेन.इन पर निःशुल्क देख सकते हैं। वैज्ञानिक समुदाय का मानना है कि इस तरह की खुली पहुंच वैश्विक स्तर पर मस्तिष्क अनुसंधान को नई गति दे सकती है।
अल्जाइमर व पार्किंसंस जैसे रोगों के शोध को मिल सकती है नई दिशा
विशेषज्ञों का मानना है कि यह एटलस अल्जाइमर, पार्किंसंस, स्ट्रोक और ब्रेन ट्यूमर जैसी तंत्रिका संबंधी बीमारियों के अध्ययन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसकी सहायता से प्रभावित कोशिकाओं और मस्तिष्कीय संरचनाओं की पहचान अधिक सटीकता से की जा सकेगी। इससे रोगों के जैविक कारणों को समझने और भविष्य में बेहतर निदान तथा उपचार विकसित करने संबंधी अनुसंधान को गति मिलने की उम्मीद है। आईआईटी मद्रास की यह उपलब्धि न केवल भारत में न्यूरोसाइंस अनुसंधान की बढ़ती क्षमता को रेखांकित करती है।