इस साल कोरोना वायरस की वजह से इंजीनियरिंग और मेडिकल के कॉलेजों में दाखिला लेने के लिए होने वाली परीक्षाओं नीट और जेईई काफी विवाद में है। पिछले कई दिनों से छात्र और छात्राएं सरकार से अपील कर रहे हैं कि वो अपने फैसले को वापस लें और इन दोनों परीक्षाओं का महामारी के समय स्थगित कर दें।
हालांकि इन दोनों परीक्षाओं को लेकर दो गुट सामने आ रहे हैं। एक तो छात्र जो परीक्षाओं को रद्द करने की मांग कर रहे हैं तो दूसरा, संस्थानों के निदेशक और अलग-अलग एजेंसी इस फैसले का समर्थन कर रही हैं। जेईई एडवांस 2021 के आयोजक संस्थान और आईआईटी खड़गपुर के डायरेक्टर भी इसके पक्ष में हैं।
उन्होंने कहा कि परीक्षा की बजाय दूसरे विकल्प तलाश कर दाखिला देने से आईआईटी और मेडिकल की पढ़ाई की गुणवत्ता और पारदर्शिता खत्म होगी। क्या ये छात्र और अभिभावक को भविष्य में मंजूर होगा। दुनिया भर में जेईई और नीट की विश्वनीयता पर भी सवाल खड़े हो जाएंगे और वो खराब भी हो सकती है।
इसके अलावा आईआईटी के बाद अब एआईसीटीई और यूजीसी चेयरमैन भी छात्रों के विरोध में उतरे हैं। उनका कहना है कि इन दोनों परीक्षाओं की देरी के चलते देश भर के कॉलेजो में लाखों सीट के लिए दाखिला विंडो बंद हो जाएगी। इन दोनों परीक्षाओं की देरी से लाखों शिक्षकों की नौकरी पर खतरा बन सकता है।
तीसरी और चौथी कक्षा जैसी परीक्षा नहीं हैं नीट और जेईई - नरोत्तम मिश्रा
इधर मध्य प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि नीट और जेईई परीक्षाएं तीसरी और चौथी कक्षा की परीक्षाएं नहीं हैं। राष्ट्र में योगदान करने के लिए छात्र इस परीक्षा को पास करते हैं। ये परीक्षाएं जरूरी हैं, इसलिए इसका कोई मुद्दा बनाने की जरूरत नहीं है।
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने जारी किये आकंड़ों के मुताबिक नीट में आज सुबह दस बजे तक 9,09,481 और जेईई के 7,45,856 छात्रों ने एडमिट कार्ड डाऊनलोड कर लिए हैं। बता दें कि सरकार ने इस पर अपना रुख साफ रखा है और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने भी साफ तौर पर कह दिया है कि नीट और जेईई की परीक्षाएं तय समय से होंगी।