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आईआईटी बॉम्बे छात्र मौत मामला: डूला के समर्थन में फैकल्टी का मार्च; पिता बोले- जाति के नाम पर किया परेशान

Mon, 21 Sep 2026 07:23 PM IST
शिवम गर्ग पीटीआई, मुंबई

सार

आईआईटी बॉम्बे छात्र साहिल वाकोडे की मौत के मामले में विवाद बढ़ता जा रहा है। प्रो. सूर्यनारायण डूला के समर्थन में फैकल्टी फोरम ने मार्च निकाला, जबकि साहिल के पिता ने प्रोफेसर और संस्थान पर जातीय भेदभाव व उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। मामले में एफआईआर दर्ज है और क्राइम ब्रांच जांच कर रही है।
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आईआईटी बॉम्बे - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार
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आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की मौत के मामले में विवाद लगातार बढ़ रहा है। सोमवार को संस्थान के फैकल्टी फोरम ने प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला के समर्थन में मार्च निकाला। डूला को मामले के बीच डीन (एडमिनिस्ट्रेटिव अफेयर्स) की जिम्मेदारी से हटा दिया गया है। हालांकि, फैकल्टी फोरम ने स्पष्ट किया कि उन्हें संस्थान की फैकल्टी सेवा से निलंबित नहीं किया गया है और वह अभी भी शिक्षक के रूप में संस्थान का हिस्सा हैं।

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साहिल वाकोडे की 18 सितंबर को आईआईटी बॉम्बे के पवई कैंपस स्थित हॉस्टल के कमरे में मौत हो गई थी। वह एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में बीटेक के दूसरे वर्ष के छात्र थे। उनकी मौत के बाद कैंपस में छात्रों का विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। मामले की जांच अब मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच कर रही है।

फैकल्टी फोरम ने डूला का किया समर्थन
आईआईटी बॉम्बे फैकल्टी फोरम के अध्यक्ष प्रो. राजकुमार एस. पंत ने बयान जारी कर कहा कि प्रो. डूला को प्रशासनिक जिम्मेदारियों से जांच को स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ाने के लिए हटाया गया है। फोरम ने कहा कि डूला अभी भी संस्थान के फैकल्टी सदस्य हैं। फोरम ने डूला के कार्यकाल के दौरान छात्रों के कल्याण के लिए उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया और उनके समर्थन में कैंपस में मार्च निकाला।
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एफआईआर में प्रो. डूला का नाम
साहिल के परिवार की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है। एफआईआर में प्रो. सूर्यनारायण डूला समेत अन्य लोगों के नाम हैं। मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम से जुड़े प्रावधान लगाए गए हैं। इन आरोपों की जांच अभी जारी है।

साहिल के पिता रविंद्र वाकोडे ने आरोप लगाया है कि उनके बेटे को जाति को लेकर कथित तौर पर परेशान किया जाता था। परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, ये आरोप अभी जांच का विषय हैं।

परीक्षा में मोबाइल इस्तेमाल का भी मामला
साहिल की मौत से पहले परीक्षा से जुड़ा एक मामला सामने आया था। आईआईटी बॉम्बे के शुरुआती बयान के अनुसार, परीक्षा के दौरान साहिल के पास मोबाइल फोन मिला था और आरोप था कि उसने प्रश्नपत्र को एआई प्लेटफॉर्म पर अपलोड कर जवाब हासिल करने की कोशिश की थी। बाद में छात्रों और परिवार की ओर से संस्थान के शुरुआती बयान पर सवाल उठाए गए। छात्रों ने आरोप लगाया कि जांच पूरी होने से पहले साहिल के बारे में ऐसी जानकारी सार्वजनिक करना उचित नहीं था।

इसके बाद आईआईटी बॉम्बे ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए कहा कि जांच पूरी होने से पहले घटना से जुड़े तथ्यों को तय रूप में पेश करना उचित नहीं था।

कैंपस में प्रदर्शन, यूथ कांग्रेस कार्यकर्ता हिरासत में
साहिल की मौत के बाद आईआईटी बॉम्बे कैंपस में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों ने मामले की स्वतंत्र जांच, जवाबदेही और संस्थान में छात्र कल्याण से जुड़े सुधारों की मांग की। सोमवार को आईआईटी बॉम्बे के गेट के बाहर प्रदर्शन कर रहे यूथ कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। कैंपस और आसपास सुरक्षा भी बढ़ाई गई।



छात्रों से बातचीत के लिए ओपन हाउस
विरोध के बीच आईआईटी बॉम्बे प्रशासन ने छात्रों के साथ ओपन हाउस आयोजित करने की घोषणा की। यह बैठक कन्वोकेशन हॉल में रखी गई, जहां छात्रों को अपने सवाल पहले से जमा करने के लिए कहा गया। इस दौरान छात्रों की ओर से साहिल की मौत, जांच, कैंपस में शिकायत व्यवस्था और छात्र कल्याण से जुड़े मुद्दे उठाए जाने की उम्मीद है।
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मामले की जांच अभी जारी है। पुलिस घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर रही है। इसलिए साहिल की मौत के पीछे की परिस्थितियों और लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

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