आईआईटी भुवनेश्वर के शोधकर्ताओं ने पिछले दो दशकों में 141 प्रमुख शहरों में बढ़ते तापमान पर शहरीकरण और स्थानीय जलवायु में आ रहे बदलावों के प्रभावों का अध्ययन किया। तापमान के ये आंकड़े भूमि की सतह के पास बढ़ते तापमान के रुझानों को दर्शाते हैं।
शहरीकरण ने भारतीय शहरों में गर्मी को 60 फीसदी तक बढ़ा दिया है। पूर्वी भारत के टियर-2 शहर इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। उदाहरण के लिए ओडिशा के भुवनेश्वर में शहरीकरण ने गर्मी में 90 फीसदी का योगदान दिया है। यह बात भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) भुवनेश्वर के शोधकर्ताओं के अध्ययन में सामने आई है। शोधकर्ता सौम्या सत्यकांत सेठी और वी विनोज के अध्ययन के नतीजे अंतरराष्ट्रीय जर्नल नेचर सिटीज में प्रकाशित हुए हैं।
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`शोधकर्ताओं ने पिछले दो दशकों में 141 प्रमुख शहरों में बढ़ते तापमान पर शहरीकरण और स्थानीय जलवायु में आ रहे बदलावों के प्रभावों का अध्ययन किया। इन शहरों में बढ़ते तापमान के रुझानों को जानने के लिए 2003 से 2020 के बीच नासा के उपग्रह से प्राप्त आंकड़ों की मदद ली है। तापमान के ये आंकड़े भूमि की सतह के पास बढ़ते तापमान के रुझानों को दर्शाते हैं। इनकी मदद से शोधकर्ताओं ने शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते तापमान के रुझानों की तुलना की है। शोधकर्ताओं के अनुसार जहां ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते तापमान की वजह क्षेत्रीय तौर पर जलवायु में आ रहे बदलाव हैं, वहीं शहरों में इसके लिए जलवायु परिवर्तन और शहरीकरण दोनों ही जिम्मेदार हैं। यानी शहरों में बढ़ता कंक्रीट और भूमि उपयोग में आता बदलाव अतिरिक्त गर्मी पैदा कर रहा है।
और बढ़ेगा खतरा
अध्ययन में अनुमान व्यक्त किया गया है कि 2050 तक दुनिया की 68 फीसदी आबादी शहरों में रह, रही होगी। तब तक भीषण गर्मी का खतरा और बढ़ जाएगा। सामाजिक उन्नति का संकेत माने जाने के बावजूद तेजी से होते अनियोजित शहरीकरण ने दुनिया के कई हिस्सों में पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा पैदा कर दिया है। इससे स्वयं इन्सान भी सुरक्षित नहीं हैं।