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आईआईएमसी पुस्तकालय: हिंदी पत्रकारिता के प्रवर्तक पं. युगल किशोर शुक्ल के नाम पर देश का पहला स्मारक

Thu, 17 Jun 2021 05:57 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आज से 195 वर्ष पहले पं. युगल किशोर शुक्ल ने 'उदन्त मार्तंड' नाम से देश का पहला हिंदी अखबार शुरू किया था। उनकी याद में आईआईएमसी ने अब एक पुस्तकालय की स्थापना कर उनकी स्मृति को चिरकालिक बनाने का उपक्रम किया है। 
 
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विस्तार
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भारतीय जन संचार संस्थान दिल्ली में पं. युगल किशोर शुक्ल की स्मृति में एक पुस्कालय की स्थापना की गई है। पं. शुक्ल ने आज से 195 साल पहले  सन 1826 में  'उदन्त मार्तंड' नाम से देश का पहला हिंदी अखबार शुरू किया था। इस मौके पर भारतीय जन संचार संस्थान के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा कि पं. शुक्ल का पूरा जीवन हिंदी पत्रकारिता, भारतबोध और सामाजिक प्रतिबद्धताओं को समर्पित था। उन्होंने पत्रकारिता में मूल्यों को समझा था और लोक कल्याण और जनसरोकार की पत्रकारिता की थी। पं. युगल किशोर शुक्ल व्यक्ति नहीं, एक विचार हैं। 

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आईआईएमसी का यह पुस्तकालय हिंदी पत्रकारिता के प्रवर्तक पं. युगल किशोर शुक्ल के नाम पर देश का पहला स्मारक है। कार्यक्रम में संस्थान के अपर महानिदेशक के. सतीश नंबूदिरीपाद विशेष तौर पर उपस्थित थे। प्रो. द्विवेदी ने कहा कि हमारे लिए बड़े गर्व का विषय है कि आईआईएमसी का पुस्तकालय अब पं. शुक्ल के नाम से जाना जाएगा। 

इस अवसर पर "हिंदी पत्रकारिता की प्रथम प्रतिज्ञा: हिंदुस्तानियों के हित के हेत" विषय पर एक विशेष विमर्श का आयोजन भी किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार विष्णु त्रिपाठी मुख्य अतिथि के रूप में तथा पद्मश्री से अलंकृत वरिष्ठ पत्रकार विजय दत्त श्रीधर मुख्य वक्ता के तौर पर शामिल हुए। 
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देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की निदेशक डॉ. सोनाली नरगुंदे, पांडिचेरी विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ. सी. जय शंकर बाबू, कोलकाता प्रेस क्लब के अध्यक्ष स्नेहाशीष सुर एवं आईआईएमसी, ढेंकनाल केंद्र के निदेशक प्रो. मृणाल चटर्जी ने भी वेबिनार में अपने विचार व्यक्त किए। 

अपने भाषण में पत्रकार विष्णु त्रिपाठी ने कहा कि पं. युगल किशोर शुक्ल में समाज और राष्ट्र की ज्वलंत समस्याओं के बारे में असाधारण जागरुकता थी और सच कहने का साहस भी था।  पत्रकारिता के लिए सिर्फ राजनीतिक चेतना नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना की भी आवश्यकता है।

पत्रकार विजय दत्त श्रीधर ने कहा कि आज से 195 वर्ष पूर्व पं. युगल किशोर शुक्ल ने सूचना की शक्ति को पहचान लिया था। उन्हें पता था कि समाज के लिए सूचना बहुत ही हितकारी है। श्रीधर ने कहा कि पत्रकारिता सिर्फ व्यवसाय नहीं है। पत्रकारिता में जब सामाजिक सरोकार प्रबल होंगे, तभी पत्रकारिता की सार्थकता है। 

पांडिचेरी विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ. सी. जय शंकर बाबु ने कहा कि आज अतीत के हमारे प्रामाणिक शोधों के डिजिटलाइजेशन की आवश्यकता है, जिससे हमारी आने वाली पीढ़ी इसका लाभ उठा सके। 

देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की निदेशक डॉ. सोनाली नरगुंदे ने कहा कि भारतीय भाषाओं के बीच समन्वय का भाव आवश्यक है। अगर हमें भाषाओं को सींचना है, तो सभी को मिलजुलकर प्रयास करने होंगे, जिसमें महत्वपूर्ण भूमिका हिंदी भाषी लोगों को निभानी होगी। 

कोलकाता प्रेस क्लब के अध्यक्ष स्नेहाशीष सुर ने कहा कि हिंदी भारतीय भाषाओं के बीच संपर्क का माध्यम है। पिछले कुछ समय से हिंदी के साथ अन्य भाषाओं के लोगों की सहजता बढ़ी है और परस्पर आदान-प्रदान से दोनों ही भाषाएं समृद्ध होती हैं। 

आईआईएमसी, ढेंकनाल केंद्र के निदेशक प्रो. मृणाल चटर्जी ने बताया कि आर्थिक तंगी के बावजूद पं. युगल किशोर शुक्ल ने 'उदन्त मार्तण्ड' का प्रकाशन किया था। उन्होंने कहा कि किसी भी देश को अपने महापुरुषों का भुलाना नहीं चाहिए और उनके अनुभवों से प्रेरणा लेनी चाहिए। 

कार्यक्रम का संचालन डीन (छात्र कल्याण) प्रो. (डॉ.) प्रमोद कुमार ने किया। धन्यवाद ज्ञापन आईआईएमसी, जम्मू केंद्र के निदेशक प्रो. (डॉ.) राकेश गोस्वामी ने किया।

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