ISRO Aditya L1 Mission. File Photo
- फोटो : Istock
चंद्रयान-3 की सफलता के बाद इसरो सूर्य पर तिरंगा लहराने के लिए तैयार है। बता दें, दो सितंबर को श्रीहरिकोटा से आदित्य-एल 1 लॉन्च किया जाएगा। इससे पहले इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स (आईआईए) ने बताया कि उन्होंने विजिबल एमिशन लाइन कोरोनाग्राफ (वीईएलसी) को डिजाइन और असेंबल किया है। इसी के साथ उन्होंने इसका परीक्षण भी किया है। वीईएलसी आदित्य-एल 1 के सात पेलोड में से एक है, जो आईआईए ने इसरो के सहयोग से तैयार किया था।
मिशन में यह पेलोड भी शामिल
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सूर्य मिशन में वीईएलसी के अलाव छह अन्य पेलोड भी हैं, जिनमें सौर पराबैंगनी इमेजिंग टेलीस्कोप (एसयूआईटी), आदित्य सौर पवन कण प्रयोग (एएसपीईएक्स), आदित्य के लिए प्लाज्मा विश्लेषक पैकेज (पीएपीए), सौर कम ऊर्जा एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर (SoLEXS), उच्च ऊर्जा L1 ऑर्बिटिंग एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर HEL1OS और मैग्नोटोमीटर शामिल हैं।
आईआईए- सौर कोरोना की समझ बढ़ाएंगें
आईआईए ने बताया कि आदित्य-एल 1 का वीईएलसी पेलोड एक आंतरिक और गुप्त सौर कोरोनोग्राफ है। इसमें इमेजिंग, स्पेक्ट्रोस्कोपी और स्पेक्ट्रो-पोलरिमेट्री चैनल हैं। वीईएलसी को सौर कोरोनाग्राफ बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। बता दें, पहले मिशन का नाम आदित्य-1 था। लेकिन एल-1 के चारों चक्कर लगाने के कारण इसे संशोधित किया गया और मिशन का नाम आदित्य-एल 1 रखा गया। आईआईए ने बताया कि मिशन से वैज्ञानिक अध्ययन सौर कोरोना की समझ को बढ़ाएंगे। इसके अलावा, अंतरिक्ष मौसम का भी अध्ययन किया जाएगा।