पश्चिम बंगाल में संदेशखाली हिंसा मामले में आदिवासी और दलित समुदायों की महिलाओं ने अपने ऊपर हुए अत्याचारों के बारे में खुलकर बात की। सभी ने मांग की कि आरोपी शेख शाहजहां के दो भाइयों को भी गिरफ्तार किया जाए।
राष्ट्रीय राजधानी के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में शुक्रवार को मीडियाकर्मियों के साथ 'सब कुछ बताएं' बातचीत में महिलाओं ने शाहजहां के भाइयों - शेख सिराज और आलमगीर की गिरफ्तारी की मांग की। उन्होंने अपनी दुर्दशा साझा की और दावा किया कि दोनों भाई उनको धमकी दे रहे थे।
उत्तर 24 परगना जिले में द्वीप की महिलाओं के प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि पिछले कई वर्षों से, शाहजहां ने करीब दो महीने तक अपने सहयोगियों के साथ मिलकर उनका शारीरिक, आर्थिक और सामाजिक शोषण किया। संदेशखाली की एक महिला ने आरोप लगाया, 'अगर कोई महिला टीएमसी नेता (शाहजहां) या उसके सहयोगियों का विरोध करने या उनके सामने खड़े होने की हिम्मत करती है, तो उसके परिवार के सदस्यों को पीटा जाता है और उनके बच्चों को हत्या की धमकी दी जाती है।'
आरोपियों को सुरक्षा दे रही थी बंगाल सरकार
प्रतिनिधिमंडल ने आगे बताया कि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति सहित अनुसूचित जाति आयोग और महिला आयोग की टीमों ने भी संदेशखाली का दौरा किया। टीम ने पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने का वादा किया, लेकिन ऐसा नहीं हो सका, क्योंकि बंगाल सरकार ने आरोपी और उसके सहयोगियों को सुरक्षा देना जारी रखा।
महिलाओं दावा किया कि जब निलंबित टीएमसी नेता सीबीआई की हिरासत में थे, तब भी उनके गुर्गे संदेशखाली में घूम रहे थे और महिलाओं को धमकी दे रहे थे।उन्होंने आगे आरोप लगाया कि शाहजहां के भाई-बहन पीड़ितों को धमकी दे रहे थे। उन्होंने कहा कि संदेशखली की घटनाओं पर रोष कम होने और मीडिया और अदालतों का ध्यान अन्य मुद्दों पर केंद्रित होने के बाद कोई भी उनके समर्थन में खड़ा नहीं होगा।
संदेशखाली की महिलाएं विरोध में भड़क उठीं और निष्कासित टीएमसी विधायक शेख शाहजहां और उनके सहयोगियों पर गंभीर ज्यादतियों और अत्याचारों का आरोप लगाते हुए सड़कों पर उतर आईं। कई महिलाओं ने शाजहान और उसके सहयोगियों पर जबरदस्ती जमीन हड़पने और यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया।