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हर साल बच सकती हैं पांच लाख जान, अगर हम भी करें अंगदान

डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संदीप भट्ट Updated Fri, 26 Jul 2019 01:00 AM IST
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- फोटो : Social Media

भारत में जागरुकता की कमी के कारण बहुत कम अंगदान हो रहा है, जबकि अंगदान की कमी के कारण प्रति वर्ष लगभग पांच लाख लोगों की मौत हो रही है। ऐसा तब है जब दुर्घटनाओं के कारण प्रति वर्ष भारी संख्या में लोग 'ब्रेन डेड' हो जाते हैं जिनके अंगों का दान करवाकर लाखों लोगों की जिंदगी को बचाया जा सकता है।



विशेषज्ञों का कहना है कि अंगदान के लिए विशेष अभियान चलाकर जागरुकता उत्पन्न करने की कोशिश की जानी चाहिए जिससे लोग इसके लिए आगे आएं। प्रति वर्ष 13 अगस्त को अंगदान दिवस मनाया जाता है। 

बहुत कम है अंगदान करने वालों की संख्या

जागरुकता की कमी के कारण भारत में अंगदान करने से लोग अब भी हिचकते हैं। धार्मिक या सामाजिक कारणों से लोग अंगदान करने से बचते हैं। यही कारण है कि अंगदान करने के मामले में भारत दुनिया में बेहद पिछड़ा हुआ है। यहां प्रति दस लाख की आबादी पर केवल 0.5 लोग अंगदान करते हैं। जबकि प्रति दस लाख की आबादी पर स्पेन में 36 लोग, क्रोएशिया में 35 और अमेरिका में 27 लोग अंगदान करते हैं।  



'ब्रेन डेड' या 'मानसिक मृत' हो चुके लोगों के परिवार जन भी अंगदान करने से बचते हैं जबकि यह निश्चित हो जाता है कि ऐसे लोगों का जीवनकाल बढ़ाना अब संभव नहीं है। यही कारण है कि इस मामले में भी अंगदान बहुत कम हो रहा है। वर्ष 2018 में महाराष्ट्र में 132, तमिलनाडु में 137, तेलंगाना में 167 और आंध्रप्रदेश में 45 और चंडीगढ़ में केवल 35 अंगदान हुए।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

ग्लेनईगल्स ग्लोबल हॉस्पीटल के चेयरमैन डॉ. संदीप अटावर का कहना है कि जागरुकता की कमी के कारण भारत में अंगदान की कमी के कारण लाखों लोगों की मौत हो जाती है। हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए लगभग 50 हजार और फेफड़ों के ट्रांसप्लांट के लिए 20 हजार लोगों की प्रतीक्षा सूची सरकार के पास उपलब्ध रहती है। लेकिन अंगदाताओं की कमी के कारण इनमें से बहुतों को बचा पाना संभव नहीं होता। 



उन्होंने कहा कि सरकार ने अंगदान कराने के लिए काफी प्रयास भी किये हैं, लेकिन ये कारगर नहीं हुए हैं। अगर शीर्ष फिल्मी-सामाजिक हस्तियों से इसके बारे में प्रचार कराया जाए तो अंगदान बढ़ाया जा सकता है। सरकार को कानून बनाने के साथ उसके अनुपालन पर भी ध्यान देना चाहिए।  

अंगदान की कमी के कारण मरते हैं पांच लाख लोग

एक आंकड़े के मुताबिक अंगदान की कमी के कारण अकेले भारत में प्रति वर्ष पांच लाख लोग मर जाते हैं। एनसीआरबी की एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2015 में रेल, बसों, ट्रकों या अन्य तरीके से कुल 496,762 दुर्घटनाएं हुई।


इनमें सड़क हादसों की संख्या 4,64,674 थी। इन सड़क हादसों में कुल 148,707 लोगों की जान गई। डॉक्टरों का कहना है कि दुर्भाग्य से यही वे लोग हैं जिनका अंगदान कराया जा सकता है और इसके माध्यम से लाखों लोगों की जिंदगी बचाया जा सकता है।  


दुर्घटना के कारण हुई मौत के बाद परिवार जनों की भावनाओं का ख्याल करते हुए उन्हें अंगदान के लिए तैयार करवाना काफी मुश्किल भरा काम होता है। कई अस्पताल इस मुश्किल की घड़ी में परिवार जनों की काउंसलिंग कर उन्हें अंगदान के लिए तैयार करवाने के लिए विशेष काउंसल की नियुक्ति करते हैं। 

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