सुरक्षा में तैनात जवान(सांकेतिक तस्वीर)
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रक्षा विश्लेषक
लक्ष्मण के बेहरा को इस बजट से उम्मीद थी कि सरकार अंतरिम बजट के कमियों की भरपाई कर देगी। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री करीब 10 फीसदी बढोत्तरी भी कर दी होती तो रक्षा क्षेत्र के आधुनिकीरण की योजना को आधारभूत ताकत मिलती। इस साल रक्षा को 3.01 लोख करोड़ मिल रहा है जिसका ज्यादातर भाग तनख्वाह, पेंशन और रखा रखाव में ही खर्च हो जाएगा है।
देश का रक्षा क्षेत्र व्यक्ति प्रधान है। यही वजह है कि इसके तकनीकी आधुनिकीकरण की सख्त जरुरत है। इसके लिए सालों से इंतजार हो रहा है कि सरकार रक्षा को बजट का बड़ा हिस्सा देगी। लेकिन पांच या सात फीसदी की बढोत्तरी और रुपए के अवमूल्यन से स्थिति ज्यों की त्यों बनी रहती है। हालांकि भारत का रक्षा बजट अमेरिका और चीन के बाद विश्व का तीसरा बड़ा बजट है। लेकिन यह इस क्षेत्र में धन की बड़ी मांगों को पूरा नहीं कर रहा।
हालांकि ऐसा नहीं कि इससे आधुनिकीकरण पूरी तरह रुक जाएगा। सरकार ने इसके दूसरे उपाए किए हैं। लेकिन अतिरिक्त बजट के बिना इसमें काफी लंबा समय लग जाएगा। यह चीन और पाकिसतान के मद्देनजर सामरिक लिहाज से ठीक नहीं माना जा सकता। लेकिन सरकार की मंशा पर सवाल नहीं खड़ा किया जा सकता।
(लक्ष्मण के बेहरा, रक्षा विश्लेषक, आईडीएसए से गुंजन कुमार की बातचीत पर आधारित)