सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर किसी आपराधिक आरोप का जवाब देने के लिए किसी विदेशी का हाजिर होना आवश्यक हो तो उसे भारत छोड़ने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा कि किसी विदेशी नागरिक को जमानत देते समय अदालत को राज्य या अभियोजन एजेंसी को निर्देश जारी करना चाहिए कि वह विदेशी पंजीकरण नियमों, 1992 के तहत संबंधित पंजीकरण अधिकारी, सभी प्रासंगिक एजेंसियों को अपने आदेश के बारे में तुरंत सूचित करे। नागरिक प्रशासन आदेश (1948 आदेश) के तहत किसी विदेशी के आवागमन पर प्रतिबंध लगा सकता है।
शीर्ष कोर्ट का यह आदेश उस मामले में आया, जिसमें उसने पिछले साल जुलाई में नशीले पदार्थ के मामले में एक नाइजीरियाई नागरिक पर लगाई गई जमानत शर्तों से संबंधित दो मुख्य मुद्दों पर फैसला किया था। शीर्ष कोर्ट ने जमानत की शर्तों को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्राप्त निजता के अधिकार का उल्लंघन माना था, जो एक जांच एजेंसी को किसी आरोपी की गतिविधियों पर लगातार नजर रखने की अनुमति देती थी।
सोमवार को पारित अपने आदेश में पीठ ने कहा कि जमानत पर रिहा होने के बाद कोई विदेशी नागरिक बिना प्रशासन की अनुमति के देश नहीं छोड़ सकता। देश छोड़ने की सूचना उसे प्रशासन को देना होगा, ताकि वह उचित कानूनी कदम उठा सके। पीठ ने अपने आदेश की कॉपी को देश के सभी हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भेजने का निर्देश दिया।