अध्ययन के लेखकों के मुताबिक, प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने के लिए महज चार नीतियां ही काफी हैं। इसके लिए नए उत्पादों को 40 फीसदी लोगों के इस्तेमाल किए गए रिसाइकल प्लास्टिक से बनाया जाना जरूरी है। साथ ही नए प्लास्टिक उत्पादन को 2020 के स्तर के दायरे में लाना होगा।
अभी से एहतियाती कदम नहीं उठाए गए, तो दुनियाभर में प्लास्टिक कचरा 2050 तक दोगुना हो सकता है।
विज्ञापन
रिसाइकल प्लास्टिक का इस्तेमाल, कचरा प्रबंधन में निवेश जैसी नीतियों को लागू करने से इस कचरे में 90 फीसदी से अधिक की कमी की जा सकती है। इससे जुड़े ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को भी एक तिहाई तक कम किया जा सकता है। अमेरिका के कैलिफोर्निया विवि सांता बारबरा के शोधकर्ताओं का यह अध्ययन साइंस जर्नल में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं के मुतािबक, अध्ययन के नतीजे प्लास्टिक संकट से निपटने के लिए एक अहम खाका दे सकते हैं।
महज चार नीतियां कर देंगी प्लास्टिक कचरे का प्रबंधन
अध्ययन के लेखकों के मुताबिक, प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने के लिए महज चार नीतियां ही काफी हैं। इसके लिए नए उत्पादों को 40 फीसदी लोगों के इस्तेमाल किए गए रिसाइकल प्लास्टिक से बनाया जाना जरूरी है। साथ ही नए प्लास्टिक उत्पादन को 2020 के स्तर के दायरे में लाना होगा। प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन में अहम निवेश करना और प्लास्टिक पैकेजिंग पर शुल्क लगाना भी खासा जरूरी है ताकि इसका इस्तेमाल कम हो। प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन में लैंडफिल और कचरा इकट्ठा करने वाली सेवाएं भी शामिल हैं।