केन्द्र सरकार के अस्पतालों में इलाज कराने आने वाले मरीजों को यदि इलाज के दौरान कोई दिक्कत हुई और मरीज ने इसकी जानकारी प्रशासन को दी तो अस्पताल प्रमुख की परेशानी बढ़ेगी। मरीज की ओर से नेगेटिव फीडबैक मिलने पर अस्पताल प्रमुख के वार्षिक गोपनीय (एसीआर) पर इसका असर पड़ेगा।
एसीआर लिखते समय मरीज के फीडबैक को ध्यान में रखा जाएगा। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से राज्यों को भी इस योजना को लागू करने की सलाह दी जाएगी। केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि केन्द्र सरकार के अस्पतालों में जल्द ही इस योजना को लागू किया जाएगा।
योजना के मुताबिक मरीज जब अस्पताल से इलाज कराने के बाद निकलेगा तब उसके मोबाइल पर एक एसएमएस आएगा जिसमें उससे अस्पताल में इलाज कराने के अनुभव के बारे में पूछा जाएगा। यदि मरीज पहले जवाब में संतुष्ट लिख देगा तो उससे दूसरा सवाल नहीं किया जाएगा, लेकिन असंतुष्ट होने के विकल्प चुनने के बाद आपसे कई अन्य सवाल पूछे जाएंगे।