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विश्व की आर्थिक महाशक्ति बन सकता है भारत अगर मोदी सरकार करे ये काम

Thu, 04 Jul 2019 06:12 PM IST
Gaurav Pandey डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में बजट पूर्व आर्थिक सर्वे पेश किया। आर्थिक सर्वे में देश को वित्त वर्ष 2024-25 तक पांच हजार अरब अमेरिकी डॉलर वाली अर्थव्यवस्था बनाने के लिए आठ फीसदी की सकल घरेलू उत्पाद दर बनाए रखने की आवश्यकता बताई गई है। 

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मौजूदा वित्त वर्ष 2019-20 में यह दर सात फीसद लगभग रहने की उम्मीद जताई गई है। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में यह लक्ष्य हासिल करना कठिन है, लेकिन अगर सरकार कुछ ठोस नीतिगत निर्णय लेने की हिम्मत दिखाए तो यह लक्ष्य हासिल की जा सकती है। 

औद्योगिक कंपनियों के संगठन एसोचैम के उप निदेशक सौरभ सान्याल ने अमर उजाला को बताया कि केंद्र सरकार के सामने इस समय रोजगार, ऑटो सेक्टर, कृषि क्षेत्र की निम्न विकास दर और कम निवेश बड़ी चिंता का विषय है। लेकिन सरकार नीतिगत निर्णय लेकर इन सभी मोर्चों पर तेज प्रगति कर सकती है और देश को पांच हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाई जा सकती है।

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सौरभ सान्याल के मुताबिक देश की अर्थव्यवस्था को दुबारा पटरी पर दौड़ाने के लिए विमानन और बीमा क्षेत्र में सौ फीसदी विदेशी निवेश की अनुमति देनी चाहिए। सरकार ने दूसरे और तीसरे स्तर के शहरों तक विमान सेवा का विस्तार करने का लक्ष्य रखा है। 

इसके लिए जितनी पूंजी और जिस तकनीकी की आवश्यकता है, वह विदेशी निवेश के बिना संभव नहीं है। इसलिए सरकार को विदेशी कंपनियों को सौ फीसदी विदेशी निवेश की अनुमति देनी चाहिए। ऐसा करने से नौकरियों के क्षेत्र में भारी अवसर बनेंगे। 

देश के सकल घरेलू उत्पाद में 14-15 फीसदी का योगदान देने वाले सेक्टर कृषि में आय बढ़ाए बिना भी देश को दुनिया के नक्शे पर आर्थिक महाशक्ति नहीं बनाया जा सकता। इसके लिए किसानों के उत्पाद को बड़ी मंडियों तक पहुंचाने की व्यवस्था करनी चाहिए, खाद्य प्रसंस्करण की तकनीकी और सब्जियों को सुरक्षित रखने के लिए तकनीकी-आधारभूत ढांचे में निवेश करना होगा। 
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इसमें भी विदेशी निवेश की खुली अनुमति देनी चाहिए। सान्याल के मुताबिक इस तरह अर्थव्यवस्था को 14-15 फीसदी से 25 फीसदी के लगभग जीडीपी में योगदान के काबिल बनाया जा सकता है। इस तरह ग्रामीण स्तर तक रोजगार के सृजन में भी मदद मिलेगी। 

जीएसटी में सुधार देश के अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में बड़ा योगदान दे सकती है। देश को मौजूदा 5, 12, 18 और 28 फीसदी की जगह 8 और 16 फीसदी के दो जीएसटी रेट पर ले जाना चाहिए। इससे औद्योगिक क्षेत्र में आई मंदी को खत्म करने में भी मदद मिलेगी और इससे निर्यात भी बढ़ेगा। 

मौजूदा समय में सीमेंट पर ज्यादा जीएसटी के कारण निर्माण क्षेत्र में भारी लागत आ रही है। इसे कम करके निर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहन दिया जा सकता है। इससे 269 अन्य क्षेत्र की कंपनियों को भी बढ़त का अवसर मिलेगा जो आर्थिक कमजोरी की स्थिति में सुधार लाएगा। पेट्रोल और बिजली सेवाओं को भी जीएसटी के दायरे में लाया जाना जरुरी है। इससे उद्योग क्षेत्र की लागत में कमी आएगी और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।
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