फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

'इंदौर साफ हो सकता है तो मुंबई क्यों नहीं?:' BMC पर हाईकोर्ट सख्त; मोशी हादसे का क्यों किया जिक्र?

Wed, 15 Jul 2026 08:11 PM IST
प्रशांत तिवारी पीटीआई, मुंबई

सार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को शहर में साफ-सफाई को लेकर बीएमसी के अधिकारियों को फटकार लगाया है। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर इंदौर लगातार 6 साल देश का सबसे साफ सुथरा शहर रह सकता है तो मुंबई क्यों नहीं।
विज्ञापन
बॉम्बे हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई की सफाई व्यवस्था पर सख्त टिप्पणी करते हुए पूछा कि जब इंदौर लगातार सबसे स्वच्छ शहर बन सकता है तो मुंबई क्यों नहीं। अदालत ने बीएमसी को सड़कों से तुरंत कचरा हटाने, ठोस कचरा प्रबंधन नियमों का सख्ती से पालन कराने और वार्ड अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए। साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर थूकने पर जुर्माना 200 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये करने का सुझाव भी दिया।

विज्ञापन


क्या मुंबई में भी मोशी जैसा हादसा हो सकता है?
अदालत ने पुणे जिले के मोशी में हाल ही में हुए कचरा संयंत्र भवन हादसे का भी जिक्र किया और कहा कि मुंबई में ऐसी घटना दोबारा नहीं होनी चाहिए। अदालत ने कहा कि मुंबई में भी कचरे के बड़े-बड़े ढेर मौजूद हैं, इसलिए समय रहते प्रभावी कदम उठाना जरूरी है।

किस मामले की सुनवाई के दौरान हुई यह टिप्पणी?
न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति आरती साठे की खंडपीठ उपनगर कांजुरमार्ग स्थित डंपिंग ग्राउंड के आसपास रहने वाले लोगों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इन याचिकाओं में प्रदूषण, लगातार फैल रही दुर्गंध, गैस उत्सर्जन और स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहे दुष्प्रभावों को लेकर चिंता जताई गई है।
विज्ञापन


मोशी हादसे में क्या हुआ था?
अदालत ने 8 जुलाई को पुणे जिले के पिंपरी-चिंचवड़ के मोशी इलाके में हुए हादसे का भी उल्लेख किया। भारी बारिश के बाद वर्षों से जमा अनुपचारित ठोस कचरे और औद्योगिक अपशिष्ट का विशाल ढेर अचानक खिसक गया और पास की दो मंजिला इमारत पर गिर पड़ा। इस दर्दनाक हादसे में नौ लोगों की मौत हो गई थी।

हाईकोर्ट ने मुंबई को लेकर क्या चिंता जताई?
खंडपीठ ने कहा कि मुंबई में भी कचरे के ऊंचे-ऊंचे ढेर हैं। यहां भी ऐसी घटना नहीं होनी चाहिए। अदालत ने माना कि समस्या केवल नगर निगम की नहीं, बल्कि नागरिकों की भी है। इच्छाशक्ति की कमी के कारण शहर की सड़कों पर कचरा फैला रहता है, जिससे मानसून के दौरान जलभराव और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं पैदा होती हैं।

नागरिकों को लेकर अदालत ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने कहा कि लोगों को भी जागरूक बनाने की जरूरत है ताकि वे सार्वजनिक स्थानों पर कचरा न फेंकें और घरों से निकलने वाले कचरे का अलग-अलग वर्गों में पृथक्करण (सेग्रिगेशन) करें। अदालत ने स्पष्ट कहा कि मुंबई में किसी भी नागरिक को सार्वजनिक सड़क पर कचरा फेंकने की छूट नहीं है। 

थूकने की आदत पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी क्यों?
अदालत ने सार्वजनिक स्थानों पर थूकने की बढ़ती प्रवृत्ति पर भी कड़ी नाराजगी जताई। खंडपीठ ने टिप्पणी की, 'हमारे देश में थूकना मानो राष्ट्रीय शौक बन गया है।' कोर्ट ने कहा कि थूकने पर वर्तमान 200 रुपये का जुर्माना बेहद कम है और इसे बढ़ाकर 2,000 रुपये किया जाना चाहिए ताकि लोगों में डर पैदा हो और इस आदत पर रोक लग सके।

वार्ड अधिकारियों को क्या निर्देश दिए गए?
हाईकोर्ट ने कहा कि प्रत्येक वार्ड अधिकारी का कर्तव्य है कि उसकी सीमा में किसी भी सड़क पर कचरा पड़ा न रहे। अदालत ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) आयुक्त को निर्देश दिया कि सभी वार्ड अधिकारियों को स्पष्ट आदेश जारी किए जाएं कि सड़क पर कहीं भी कचरा दिखाई दे तो उसे तुरंत हटाया जाए।

इंदौर का उदाहरण देकर हाईकोर्ट ने क्या कहा?
अदालत ने कहा कि इंदौर लगातार आठवीं बार देश का सबसे स्वच्छ शहर बना है। यह वहां के नगर निगम अधिकारियों की प्रतिबद्धता और इच्छाशक्ति का परिणाम है। मुंबई में ऐसा क्यों नहीं हो सकता? यदि मजबूत इरादा हो तो यह बिल्कुल भी मुश्किल नहीं है। 

ये भी पढ़ें: UP: राहुल गांधी को राहत, कोर्ट ने खारिज की निगरानी याचिका; मजिस्ट्रेट के आदेश में हस्तक्षेप से किया इनकार
विज्ञापन


ठोस कचरा प्रबंधन को लेकर कोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने कहा कि ठोस कचरा प्रबंधन नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। अदालत के अनुसार, जब तक जमीनी स्तर पर प्रभावी सावधानियां नहीं बरती जाएंगी, तब तक कचरे के संग्रहण और निस्तारण की समस्या बनी रहेगी। इससे न केवल लोगों को परेशानी होगी, बल्कि कचरे के वैज्ञानिक और प्रभावी प्रबंधन में भी गंभीर बाधाएं आएंगी। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद तय की है।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें