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दिल्ली में दम घोंटने वाला प्रदूषण रोकना है तो पंजाब के किसानों को देना होगा मुआवजा 

Thu, 18 Oct 2018 06:36 PM IST
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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पंजाब में धान की पराली जलाने से दिल्ली में जो दम घोंटने वाला प्रदूषण हो रहा है, उसका इलाज मिल गया है, मगर वह थोडा सा महंगा है, इसके लिए केंद्र सरकार को अपनी जेब ढीली करनी होगी, यह इलाज एम्स के किसी डॉक्टर या आईआईटी के विशेषज्ञ ने नहीं, बल्कि पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह ने खोजा है।

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उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी धान की पराली न जलाने की एवज में पंजाब के किसानों को उनकी फसल पर सौ रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से मुआवजा दे दें। उन्होंने गुरुवार को अपना यह प्रपोजल प्रधानमंत्री मोदी के समक्ष रखा है।

कैप्टन अमरेंद्र सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात कर उनसे कहा, पराली जलाने की समस्या का समाधान हो सकता है। इसकी रोकथाम के लिए किसानों को 100 रुपए प्रति क्विंटल मुआवजा देना होगा। उन्होंने मोदी को बताया कि कटाई की ॠतु खत्म होने पर राज्य सरकार अपने स्तर पर पराली को जलाने से रोकने के लिए कदम उठाती है, लेकिन इसके बावजूद पराली जलाने की समस्या कम नहीं हो पा रही है। 
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हो सकता है कि आगामी दिनों में यह और भी गंभीर रूप ले ले। यही वजह है कि इस समस्या को तत्काल प्रभाव से हल करने की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने कहा, मोदी ने किसानों की समस्या के प्रति हमदर्दी व्यक्त की है। पराली जलाने की वजह से सर्दियों में विशेषकर दिवाली के आसपास दिल्ली की आबोहवा खराब हो जाती है। पंजाब-हरियाणा सरकारें पराली जलाने का दावा करती हैं, लेकिन यह समस्या खत्म नहीं हो पा रही है।

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हरियाणा में अभी तक पराली जलाने के 65 मामले सामने आए

हरियाणा में पराली जलाने के अभी तक 65 मामले सामने आए हैं। इस बाबत करीब तीन दर्जन मुकदमे भी दर्ज किए गए हैं। सीपीसी के आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल भी अक्तूबर में दिल्ली की वायु गुणवत्ता में कमी होनी शुरू हो गई थी और तीसरे हफ्ते तक स्थिति भयावह थी।

नासा के अध्ययन में भी सामने आया है कि दिल्ली के प्रदूषण का पंजाब व हरियाणा में जलने वाली पराली के बीच सीधा संबंध है। पराली जलाए जाने से दिल्ली की हवा जहरीली हो रही है और यह अपने घातक स्तर पर पीएम 2.5 स्तर पर पहुंच रही है। अकसर मानसून के बाद और सर्दी शुरू होने से पहले दिल्ली में प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ जाता है जिससे लोगों को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

फसलों के जलने से दिल्ली की हवा पर पड़ने वाले प्रभाव का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि आम दिनों में दिल्ली में पीएम 2.5 का स्तर 50 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर होता है, जबकि नवंबर की शुरुआत में यह स्तर 300 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुंच जाता है। 

वहीं 2016 की सर्दियों में यह समस्या सबसे ज्यादा देखने को मिली जब लोगों का घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया था। उस वक्त पराली जलाए जाने के समय पीएम 2.5 का स्तर 550 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर हो गया था। वहीं 5 नवंबर 2016 को तो यह स्तर 700 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुंच गया। 
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