कर्नाटक मंत्री प्रियंक खरगे ने आरएसएस की फंडिंग को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि संगठन बिना रजिस्ट्रेशन के इतने बड़े पैमाने पर दान और गतिविधियां कैसे चला रहा है।
कर्नाटक के मंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के पुत्र प्रियांक खरगे ने आरएसएस द्वारा दान प्राप्त करने के तरीके पर सवाल उठाए और धन जुटाने की प्रक्रिया पर और स्पष्टीकरण मांगा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में लिखा खरगे ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के इस बयान पर प्रतिक्रिया दी कि यह संगठन पूरी तरह से अपने स्वयंसेवकों के योगदान पर चलता है।
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आरएसएस पंजीकृत क्यों नहीं?
प्रियांक खरगे ने आगे लिखा भागवत ने कहा है कि आरएसएस अपने स्वयंसेवकों द्वारा दिए गए दान के माध्यम से काम करता है। हालांकि, इस दावे को लेकर कई जायज सवाल उठते हैं। उन्होंने पूछा कि ये स्वयंसेवक कौन हैं और उनकी पहचान कैसे की जाती है, उनके दान का पैमाना और प्रकृति क्या है और किन माध्यमों से धन एकत्र किया जाता है।
मंत्री ने पूछा कि अगर संघ पूरी तरह पारदर्शी तरीके से काम करता है, तो दान सीधे संगठन के रजिस्टर्ड नाम पर क्यों नहीं लिया जाता। उन्होंने यह भी सवाल किया कि जब आरएसएस कोई पंजीकृत संस्था नहीं है, तो फिर यह वित्तीय रूप से कैसे संचालित होती है और इसके पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं को भुगतान कौन करता है।
यूनिफॉर्म और सामग्रियों पर भी सवाल
प्रियंक खड़गे ने आगे कहा देश के हर धार्मिक या सामाजिक संगठन को वित्तीय पारदर्शिता बनाए रखनी होती है, तो आरएसएस को इससे छूट क्यों? उन्होंने आरएसएस के स्वयंसेवकों द्वारा खरीदे जाने वाले यूनिफॉर्म और सामग्रियों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि इन स्थानीय कार्यालयों के खर्च का हिसाब कौन रखता है और दान की रकम का उपयोग कैसे किया जाता है।
इससे पहले मोहन भागवत ने एक कार्यक्रम में कहा था कि आरएसएस की स्थापना 1925 में हुई थी, क्या हमें ब्रिटिश सरकार के पास जाकर रजिस्ट्रेशन करवाना चाहिए था? उन्होंने बताया कि आजादी के बाद भारत सरकार ने रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य नहीं बनाया, इसलिए संघ बिना पंजीकरण के काम करता आ रहा है।