केंद्रीय कैबिनेट ने शुक्रवार को चेक बाउंस मामले में कानून में संशोधन की मंजूरी दे दी। इसके तहत चेक बाउंस होने पर पीड़ित पक्ष को लंबी कानूनी प्रक्रिया से बचाने के लिए अंतरिम क्षतिपूर्ति दिलाने का प्रावधान किया गया है। अभी ऐसा होता है कि बेईमान किस्म के लोग भुगतान अटकाने के लिए जान बूझकर चेक बाउंस करवा देते हैं।
निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट-1881 में संशोधन के बाद चेक बाउंस होने पर पीड़ित को कोर्ट अंतरिम क्षतिपूर्ति का आदेश दे सकता है। ताकि मझोले और छोटे उद्यमियों को परेशानी से बचाया जा सके। सरकार का यह कदम लेस कैश इकोनॉमी को प्रोत्साहित करने के लिए उठाया गया है। आमतौर पर जिसकी मंशा भुगतान करने की नहीं होती है, वह खाते में पर्याप्त राशि रखे बिना चेक जारी कर देता है। जब चेक बाउंस हो जाता है, तब पीड़ित पक्ष भुगतान पाने के लिए अदालतों के चक्कर काटता रहता है।
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उम्मीद की जा रही है कि मौजूदा शीतकालीन सत्र में ही सरकार इस संशोधन को पेश कर सकती है। कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने मीडियाकर्मियों को कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि सरकार ने इस कानून में संशोधन की मंजूरी दे दी है।