फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अगर चंद्रयान-2 ने पानी खोज निकाला तो भारतीय स्पेस स्टेशन बनने की राह हो जाएगी आसान

Mon, 22 Jul 2019 04:31 PM IST
गौरव द्विवेदी जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
चंद्रयान-2 मिशन - फोटो : PTI
विज्ञापन

चंद्रमा पर पानी की तलाश के लिए चंद्रयान-2 को बहुत अहम माना जा रहा है। इसकी सफलता पर दुनिया की नजरें लगी हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर चंद्रयान-2 को पानी की खोज करने में सफलता मिल गई तो चंद्रमा पर भारतीय स्पेस स्टेशन बनने की राह आसान हो जाएगी। भविष्य में चंद्रमा पर जाने वाले अंतरिक्ष यात्रियों को अपने साथ पानी लेकर नहीं जाना पड़ेगा। अन्य शोध कार्यों के साथ ही चंद्रयान-2 यह भी पता लगाएगा कि चंद्रमा पर कंपन आती है तो उसका क्या कारण है। उसकी रेंज क्या है और शुरुआती स्थल कितनी दूरी पर है, आदि। ये सब जानकारियां मिल जाती हैं तो भारत ही नहीं, दुनिया के लिए यह बहुत बड़ी उपलब्धि होगी। 

विज्ञापन


चंद्रमा पर की जा रही विभिन्न खोजों के मामले में अभी तक अमेरिका, चीन और रूस तेजी से आगे बढ़ रहे थे। अब चंद्रयान-2 की सफल लॉंचिंग के बाद इस शोध में भारत भी एक बड़ी भूमिका में आ गया है। वैज्ञानिक निमीष कपूर का कहना है कि चंद्रयान-2 की सफलता भारत के लिए कई मायनों में बहुत महत्वपूर्ण है। इसकी मदद से चंद्रमा पर चल रही पानी की खोज पूरी होगी तो वहीं दूसरे क्षेत्रों से संबंधित जानकारी भी मिल सकेगी। चंद्रमा पर पानी तो है, ऐसे संकेत पहले भी मिले हैं, लेकिन वह किस रूप में है, यह अभी तक पता नहीं चल सका है। वहां बहुत से खनिज पदार्थ हैं, उन्हीं के बीच पानी के स्वरूप और उसकी मात्रा का पता लगाया जाएगा।

नासा के वैज्ञानिकों को जब यह जानकारी मिली कि चंद्रमा पर मौजूद खनिज पदार्थों के कणों में पानी की मात्रा है तो इसके साथ एक नया सवाल खड़ा हो गया कि यह पानी कहां से आया होगा। इसका स्त्रोत क्या है। अगर वह स्थायी है तो क्या यह उम्मीद की जा सकती है कि भविष्य में भी पानी की मात्रा रहेगी या उसमें कुछ बदलाव देखने को मिलेंगे। पानी मिलने के पीछे यह तर्क दिया गया कि हो सकता है वहां ज्वालामुखी विस्फोट के समय ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई हो। उसी दौरान पानी बाहर आया हो।
विज्ञापन


अब चंद्रयान-2 से हम यह पता लगा सकेंगे कि चंद्रमा पर किस तरह की कंपन आती हैं। कंपन की रफ्तार क्या है और उसके प्रभाव किस तरह के हैं। चंद्रयान-2 यह साबित कर सकता है कि चंद्रमा पर बर्फ जैसा जो पदार्थ मिला है, क्या उसका दूसरा रूप पानी है। कई अन्य शोधों से पता चला है कि चंद्रमा के ध्रुवीय क्षेत्रों में बर्फ के रूप में पानी मौजूद है। अगर वहां पानी का स्थायी स्त्रोत मिल गया तो यह चंद्रमा पर चल रही खोजों के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम साबित होगा।

वह दिन दूर नहीं जब अंतरिक्ष में होगा भारत का अपना स्पेस स्टेशन...

दिल्ली साइंस फोरम के डी. रघुनंदन कहते हैं, चंद्रयान-2 की सफलता से एक बात पक्की हो गई है कि भारत जल्द ही अंतरिक्ष में अपना स्पेस स्टेशन बना सकेगा। हालांकि इससे पहले चीन चंद्रमा पर गांव बसाने जैसे बयान देता रहा है। पानी की खोज और उसके स्थायित्व को लेकर चंद्रयान-2 जो भी जानकारी भेजेगा, वह हमारे लिए अहम होगी। अभी स्थिति यह है कि चंद्रमा पर जाने वाले अंतरिक्ष यात्रियों को पानी साथ ले जाना पड़ता है। अगर वहां पानी मिल जाता है तो वह दिन दूर नहीं जब भारत अंतरिक्ष में खुद का स्पेस स्टेशन बना लेगा। उल्का पिंड़ों की बौछारों के दौरान क्या चंद्रमा की सतह पर पानी निकलता है, चंद्रयान-2 की मदद से इस तरह की बातों की सच्चाई तक पहुंचने में मदद मिलेगी। चंद्रमा पर रोजाना होने वाली गतिविधियां, उनके आकार और विकास, आदि बातों का भी पता चल सकेगा। इसके अलावा चंद्रमा पर मौजूद खनिज पदार्थों के बीच में बने गड्ढों में बर्फ है या कोई दूसरा पदार्थ, यह जानकारी भी मिल सकेगी।

डी. रघुनंदन कहते हैं, चंद्रयान-2 की सफलता से भारत को आर्थिक तौर पर भी मजबूती मिलेगी। पहले हम जीएसएलवी की मदद से 12 सौ किलो तक के सेटेलाइट छोड़ पा रहे थे। अब हम और आगे बढ़ गए हैं। हमने खुद के शक्तिशाली रॉकेट बना लिए हैं। इसकी मदद से हम दूसरे देशों के सेटेलाइट भी लांच कर सकते हैं। पहले हम ऐसी लॉंचिंग के लिए दूसरे देशों को पैसा देते थे। अब वह पैसा बच जाएगा, बल्कि भारत के लिए एक बाजार भी बनेगा। हम अपने शक्तिशाली रॉकेट एवं दूसरी तकनीक से विभिन्न देशों के सेटेलाइट छोड़ सकते हैं। इससे भारत को आर्थिक फायदा होगा।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें