छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में एक तात्कालिक विस्फोटक उपकरण (आईईडी) को निष्क्रिय करने के प्रयास के दौरान विस्फोट होने से जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) के तीन जवान, जिनमें एक इंस्पेक्टर भी शामिल था, शहीद हो गए। एक अन्य जवान के घायल होने की खबर है। पुलिस ने बताए कि यह आईडी पूर्व में लगाए गए थे। यह घटना छोटेबेठिया थाना क्षेत्र के घने जंगलों में हुई, जो नारायणपुर जिले की सीमा से लगा हुआ है।
कैसे हुआ ब्लास्ट?
बताया गया कि डीआरजी की एक टीम इलाके में डिमाइनिंग ऑपरेशन चला रही थी। इस अभियान का उद्देश्य नक्सलियों द्वारा पहले से लगाए गए आईडी को ढूंढकर निष्क्रिय करना था। इसी दौरान जवानों का संपर्क एक छिपे हुए विस्फोटक से हुआ, जिससे जोरदार धमाका हो गया।
पुलिस महानिरीक्षक ने क्या बताए?
बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पट्टिलिंगम ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी कैडरों से मिली सूचनाओं और अन्य खुफिया जानकारियों के आधार पर, सुरक्षा बलों ने कांकेर सहित सात जिलों वाले बस्तर रेंज में नक्सलियों द्वारा पहले लगाए गए सैकड़ों आईईडी बरामद कर उन्हें निष्क्रिय कर दिया है। उन्होंने कहा कि हालांकि, आज की दुर्भाग्यपूर्ण घटना में, कांकेर जिले की पुलिस टीम द्वारा इसे निष्क्रिय करने की कोशिश के दौरान आईईडी गलती से फट गया, जिसके परिणामस्वरूप तीन कर्मियों की मौत हो गई और एक गंभीर रूप से घायल हो गया।
यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि 31 मार्च को राज्य सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त घोषित किया गया था। इसके बाद नक्सली गतिविधियों से जुड़ा यह पहला विस्फोट है, जिसने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं।
घटना के बाद सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को घेर लिया है और व्यापक सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है, ताकि अन्य संभावित IED को खोजकर निष्क्रिय किया जा सके। पुलिस का कहना है कि क्षेत्र में नक्सलियों की संभावित गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए सतर्कता बढ़ा दी गई है।