आईडीबीआई बैंक के प्रस्तावित निजीकरण के खिलाफ विरोध तेज हो गया है। बैंक के 10,000 से अधिक कर्मचारी 2 और 3 नवंबर को देशव्यापी दो दिवसीय हड़ताल पर जाने की तैयारी कर रहे हैं। यह हड़ताल यूनाइटेड फोरम ऑफ आईडीबीआई ऑफिसर्स एंड एम्प्लॉइज के आह्वान पर बुलाई गई है, जो बैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करता है।
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आईडीबीआई बैंक के निजीकरण की प्रस्तावित योजना के खिलाफ कर्मचारियों ने आंदोलन का एलान किया है। बैंक के 10,000 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी 2 और 3 नवंबर को दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल करेंगे। यह फैसला यूनाइटेड फोरम ऑफ आईडीबीआई ऑफिसर्स एंड एम्प्लॉइज ने लिया है। संगठन ने केंद्र सरकार और बैंक प्रबंधन से निजीकरण की प्रक्रिया रोकने की मांग की है।
कर्मचारी संगठन का कहना है कि बैंक की मौजूदा वित्तीय स्थिति में सुधार के पीछे किसी निजी निवेशक का योगदान नहीं है। इसके बजाय सरकार, भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) और बैंक कर्मचारियों ने मिलकर संस्थान को संकट से बाहर निकालने में भूमिका निभाई है। यूनियन के मुताबिक, मुश्किल दौर में भी कर्मचारियों ने ग्राहकों का भरोसा बनाए रखा और बैंकिंग सेवाओं को प्रभावित नहीं होने दिया। संगठन ने बताया कि वर्ष 2016 से 2020 के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की एसेट क्वालिटी रिव्यू प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में फंसे कर्ज (एनपीए) सामने आए थे। इसके कारण बैंक को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा। इस संकट से निपटने के लिए सरकार और एलआईसी ने मिलकर 46,000 करोड़ रुपये से अधिक की पूंजी सहायता दी थी।
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यूनियन ने बैंक की वित्तीय स्थिति में आए सुधार का हवाला देते हुए कहा कि पिछले छह वर्षों में आईडीबीआई बैंक ने 30,100 करोड़ रुपये से अधिक का संचयी शुद्ध लाभ कमाया है। संगठन के अनुसार, बैंक का सकल एनपीए अनुपात वर्ष 2018 में 31.78 प्रतिशत था, जो अब घटकर 2.30 प्रतिशत रह गया है। इसी तरह, बैंक का नेट एनपीए अनुपात 0.16 प्रतिशत दर्ज किया गया है। वहीं, पूंजी पर्याप्तता अनुपात 26.38 प्रतिशत और प्रोविजन कवरेज अनुपात 99.31 प्रतिशत तक पहुंच गया है। कर्मचारी संगठन का कहना है कि ये आंकड़े बैंक की वित्तीय स्थिति में हुए सुधार को दर्शाते हैं।
यूनियन ने निजीकरण की प्रक्रिया और बैंक के प्रस्तावित मूल्यांकन पर भी सवाल उठाए हैं। संगठन के मुताबिक, सरकार बैंक का नियंत्रण कनाडा के फेयरफैक्स ग्रुप को सौंपने की दिशा में आगे बढ़ रही है। कर्मचारियों को इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी की आशंका है। उनका कहना है कि बैंक को मजबूत बनाने में कर्मचारियों, सरकार और एलआईसी की भूमिका रही है, इसलिए निजीकरण के फैसले पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए। इन्हीं मांगों को लेकर कर्मचारी संगठन ने 2 और 3 नवंबर को हड़ताल का आह्वान किया है।