रक्त में हीमोग्लोबिन का स्तर बताने वाले स्वदेशी हीमोग्लोबिनोमीटर जल्द ही जांच के दायरे में आएंगे। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने गुणवत्ता जांच का फैसला लिया है ताकि लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ न किया जा सके। साथ ही इसके अध्ययन से भारत में एनीमिया के बढ़ते बोझ को कम करने में मदद मिलेगी।
जानकारी के अनुसार, आईसीएमआर बाजार में मौजूद हीमोग्लोबिन मीटर की गुणवत्ता जांच के लिए एक अध्ययन करेगा। देश के छह संस्थानों में होने वाले इस अध्ययन में जिन कंपनियों के उत्पाद शामिल किए जाएंगे उनसे आईसीएमआर के साथ अनुबंध करने का प्रस्ताव मांगा है। जांच में मीटर की रीडिंग के साथ यह भी देखना जरूरी है कि इससे मरीज को लाभ हो रहा है या फिर नुकसान। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अभी तक हीमोग्लोबिनोमीटर की गुणवत्ता जांच को लेकर प्रयास नहीं हुआ है। यह अध्ययन अगले साल तक पूरे होने की उम्मीद है।
जांच इसलिए जरूरी
भारत ने मेक इन इंडिया अभियान के तहत गैर-इनवेसिव हीमोग्लोबिनोमीटर उपकरणों के उत्पादन में काफी तरक्की की है। बाजार में कई सस्ते उपकरण मौजूद हैं। हालांकि इनकी सटीकता स्थापित करने के लिए उपकरणों को मान्य करने की आवश्यकता है जिसके लिए आईसीएमआर ने गुणवत्ता जांच का फैसला लिया है।