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आईसीएमआर अध्ययन: मंकीपॉक्स के दो रूप, असर बराबर... त्वचा और अंगों तक वायरस पहुंचने के संकेत; कितना खतरनाक?

Wed, 21 Oct 2026 08:00 AM IST
ज्योति भास्कर अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
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मंकीपॉक्स बीमारी। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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मंकीपॉक्स के नए रूप को लेकर दुनिया में चिंता के बीच भारतीय वैज्ञानिकों ने एक अहम अध्ययन किया है। इसमें सामने आया कि वायरस के दो रूप क्लेड-आईबी और क्लेड-आईआईबी बीमारी के लक्षण और शरीर में वायरस के फैलने के मामले में लगभग एक जैसे रहे। वैज्ञानिकों ने खरगोश पर इसका अध्ययन किया। दोनों रूपों से संक्रमित खरगोशों की त्वचा पर दाने निकले, जो बाद में पपड़ी में बदले। जांच में नाक, त्वचा और अंडकोष के ऊतकों में भी वायरस की मौजूदगी मिली।

संक्रमण के करीब 5 दिन बाद दिखने लगे त्वचा पर दाने

वैज्ञानिकों ने अध्ययन में न्यूजीलैंड व्हाइट नस्ल के खरगोशों का इस्तेमाल किया। इनमें वायरस के दोनों रूपों से संक्रमण के बाद त्वचा पर लाल, उभरे हुए दाने दिखाई देने लगे। कुछ दाने आगे चलकर गहरे लाल हुए और उन पर पपड़ी जम गई। करीब दो सप्ताह में कई घाव भरने की प्रक्रिया में आ गए। दोनों तरह के वायरस से संक्रमित खरगोशों में बीमारी के लक्षणों और उनकी गंभीरता में कोई बड़ा अंतर नहीं मिला। 

कुछ खरगोशों में लक्षण नहीं फिर भी वायरस के संकेत

अध्ययन में दोनों समूहों में एक-एक खरगोश के नमूने में वायरस की आनुवंशिक सामग्री मिली, लेकिन बीमारी के साफ लक्षण दिखाई नहीं दिए। यह बताता है कि जानवरों में बाहरी लक्षण न दिखने पर जांच में वायरस के संकेत मिल सकते हैं।

नया मॉडल दवा व बचाव के उपायों की जांच में आएगा काम

आईसीएमआर ने कहा कि मंकीपॉक्स एक विषाणु से होने वाली बीमारी है, जिसमें बुखार, शरीर में दर्द, लसिका ग्रंथियों में सूजन व त्वचा पर दाने जैसे लक्षण होते हैं। इससे दवा व बचाव के उपायों की जांच में मदद मिल सकती है।

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