फॉरेंसिक शव परीक्षण के दौरान हड्डियों एवं ऊतकों के विच्छेदन से एरोसोल का निर्माण होगा जिससे संक्रमण फैलने का खतरा हो सकता है। बाहरी परीक्षणों, विभिन्न तस्वीरों एवं मौखिक शव परीक्षण के आधार पर.... किसी भी इन्वैसिव सर्जिकल प्रक्रिया से बचते हुए पोस्टमॉर्टम किया जाना चाहिये और कोशिश होनी चाहिये कि उस दौरान वहां मौजूद डॉक्टर एवं अन्य कर्मचारी मृत व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क में नहीं आएं।
आईसीएमआर के मसौदा दिशा-निर्देश के अनुसार अगर कोविड-19 जांच रिपोर्ट की प्रतीक्षा है तो अंतिम रिपोर्ट आने तक शव को शवगृह से नहीं हटाया जाना चाहिये तथा औपचारिकताओं के बाद शव जिला प्रशासन को सौंपा जाना चाहिए।
इसमें कहा गया है, 'किसी भी समय शव के पास दो से अधिक रिश्तेदारों को मौजूद होना चाहिये और उन्हें शव से एक मीटर की दूरी पर अवश्य रखनी चाहिए।' इसमें कहा गया है, 'प्लास्टिक बैग के जरिये रिश्तेदारों से शव की शिनाख्त कराई जानी चाहिये और ऐसा कानून लागू करने वाली एजेंसियों की उपस्थिति में किया जाना चाहिए।'
इसमें यह भी कहा गया है कि कानून लागू करने वाली एजेंसियों की उपस्थिति में शव को अंत्येष्टि के लिये श्मशान ले जाना चाहिये, जहां पांच से अधिक रिश्तेदारों को मौजूद रहने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिये ।