उम्र बढ़ने के साथ ही देश में मस्तिष्क से जुड़ी बीमारियां भी लोगों को परेशान करने लगती हैं। बीते 29 साल में इन बीमारियों से ग्रस्त मरीजों की संख्या दोगुना तक बढ़ चुकी है। यह खुलासा भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने एक अध्ययन में किया है जिसे मेडिकल जर्नल द लांसेट में प्रकाशित किया गया है।
इसके अनुसार साल 1990 से 2019 के बीच मस्तिष्क से जुड़ी बीमारियां (न्यूरोलॉजिकल डिसआर्डर) चार से बढ़कर 8.02 फीसदी तक हुई हैं। इनके अलावा चोट के जरिए मस्तिष्क से जुड़ी परेशानियों के मामलों में भी इजाफा देखने को मिला है। जबकि इन्हीं 29 वर्षों में मस्तिष्क से जुड़े संचारी रोगों में काफी कमी देखने को मिली है।
इन मरीजों की संख्या 4.1 से घटकर 1.1 फीसदी तक आने का अनुमान जताया गया है। अध्ययन में बताया कि साल 2019 के दौरान भारत में सबसे अधिक स्ट्रोक (37.9 फीसदी), सिरदर्द विकार (17.5फीसदी), मिर्गी (11.3 फीसदी), सेरेब्रल पाल्सी (5.7 फीसदी) और एन्सेफलाइटिस के मामले 5.3 फीसदी मिले हैं। यह सभी मस्तिष्क से जुड़ी बीमारियों में शामिल हैं।
इस अध्ययन में सलाह दी है कि गैर संचारी और चोट से संबंधित मस्तिष्क विकारों का बढ़ता योगदान देश में बीमारियों का बोझ बढ़ा रहा है। कई तंत्रिका संबंधी विकारों के बोझ से राज्यों की स्वास्थ्य प्रणाली व्यवस्था पर भी असर पड़ा है।
इन्हें लेकर न सिर्फ जागरुकता जरूरी है बल्कि समय रहते बीमारी की पहचान और उपचार भी बेहद आवश्यक है। इलाज करा चुके मरीजों का पुनर्वास बेहद जरूरी है। तभी उन्हें पूरी तरह से स्वस्थ माना जा सकता है।
वायु प्रदूषण-रक्तचाप भी मुख्य कारण
अध्ययन में पता चला है कि साल 2019 के दौरान उच्च रक्तचाप और वायु प्रदूषण की वजह से भी मस्तिष्क से जुड़ी बीमारियों को बढ़ावा मिला है। इनके अलावा असंतुलित आहार, मोटापा और रक्त में शर्करा की मात्रा बढ़ने के चलते भी लोग इन बीमारियों की चपेट में आए हैं।
इनसे बचने के लिए अध्ययन में सलाह दी गई है कि उम्र बढ़ने के साथ-साथ लोगों को अपनी दिनचर्या पर भी ध्यान देना चाहिए। अगर संचारी रोगों की बात करें तो इनके पीछे कारण प्रीमैच्योर प्रसूति व वायु प्रदूषण मिले हैं।