कोरोना संक्रमण की चपेट में आए मरीज में छह से 12 माह तक एंटीबॉडी रहती हैं लेकिन वैक्सीन लगने के बाद बनने वाली एंटीबॉडी कब तक शरीर में बनी रहती हैं? इसके अब तक वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं मिले हैं। यह साक्ष्य मिलने में अभी कुछ वक्त लग सकता है क्योंकि पूरी दुनिया में टीकाकरण को शुरू हुए अभी छह से सात महीने ही पूरे हुए हैं।
कोवाक्सिन की बूस्टर डोज को लेकर अभी प्रक्रिया शुरुआती चरण में : आईसीएमआर
यह जानकारी देते हुए आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने बताया कि कोरोना महामारी में जांच की अहम भूमिका है। वर्तमान में भारत हर दिन 10 लाख की आबादी पर 1400 लोगों की जांच हो रही है जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा तय मानकों की तुलना में 10 गुना अधिक है। दूसरी लहर के दौरान भी जांच में गति देखने को मिली जिसके जरिए संक्रमण दर को कम करने में काफी मदद मिली है।
आईसीएमआर के महानिदेशक ने कहा- अभी जानकारी मिलने में लगेगा समय
डॉ. भार्गव ने बताया कि अभी 73 जिलों में अभी 10 फीसदी से ज्यादा संक्रमण दर है। जबकि 65 जिलों में यह दर पांच से 10 फीसदी के बीच है। जबकि 595 जिलों में संक्रमण दर पांच फीसदी से कम है। यह सभी साप्ताहिक संक्रमण दर हैं जिसके आधार पर कहा जा सकता है कि देश के अधिकांश राज्य दूसरी लहर से बाहर आ चुके हैं। पांच फीसदी से कम संक्रमण दर मिलने पर संतोषजनक स्थिति मानी जाती है।
कोवाक्सिन की बूस्टर डोज पर अभी देर
डॉ. भार्गव ने बताया कि कोवाक्सिन की एक और बूूस्टर डोज पर काम चल रहा है। दो बार खुराक लेने के छह माह बाद यह बूस्टर डोज ली जा सकती है लेकिन अभी इस पर वैज्ञानिक अध्ययन की प्रक्रिया शुरुआती चरण में है। इसलिए बूस्टर डोज पर सटीक जानकारी आने में वक्त लग सकता है।