चिकित्सा विशेषज्ञों का दावा है कि आरटी-पीसीआर से कोरोना के 80 प्रतिशत मामले पहचान में आ रहे हैं। फॉल्स निगेटिव कहे जाने वाले पकड़ में न आए मामलों के लिए सीटी स्कैन, सीने के एक्सरे या स्वास्थ्य के क्लीनिकल विश्लेषण जैसे तरीकों का उपयोग करें।
एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया का कहना है कि कई बार सैंपल ठीक से न लेने, या वायरल लोड बढ़ने के पहले सैंपल लेने आदि वजहों से निगेटिव रिपोर्ट आ सकती है। लेकिन अगर मरीज में कोरोना के लक्षण हैं तो क्लीनिकल विश्लेषण के तहत इसे कोरोना मानते हुए इलाज मुहैया करवाएं। इसके 24 घंटे बाद फिर से टेस्ट करवा सकते हैं।