भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) भारतीय छात्रों को विदेशी भाषाओं का ज्ञान दिलाने के लिए एक भाषाई सेतुबंध का निर्माण करेगा। इसके जरिये छात्रों को सबसे पहले श्रीलंका, म्यांमार, कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, थाईलैंड समेत अन्य पड़ोसी देशों के भाषाओं की जानकारी दी जाएगी।
यह बातें आईसीसीआर के अध्यक्ष विनय सहस्त्रबुद्धे ने कही। वह आईसीसीआर की तरफ से कराई जा रही 13 देशों की पहली हिंदी विश्व यात्रा के सम्मेलन में बोल रहे थे। उन्होंने कहा, जैसे हम विदेशी लोगों को हिंदी पढ़ाना चाहते हैं, वैसे ही हमारे देश के छात्रों को भी विषेशतौर पर पड़ोसी देशों की भाषाओं को जानना बहुत जरूरी है। इसलिए कजाक, उज्बेक, म्यांमार में बोली जाने वाली वर्मीज, थाईलैंड की थाई, श्रीलंका की सिंहली व अन्य पड़ोसी देशों का भाषाई ज्ञान देश के छात्रों को दिलाया जाएगा।
सहस्त्रबुद्धे ने कहा कि इसके लिए आईसीसीआर वहां के विश्वविद्यालयों से बातचीत कर रहा है। ऐसा इसलिए भी किया जा रहा है ताकि हमारे छात्र सिर्फ स्पैनिश, रसिया, फ्रेंच व जर्मन भाषा तक ही सीमित न रहें। कार्यक्रम में तनजानिया से आए छात्र फदिलि अलि पाजी ने गायक अरजीत सिंह का गाना गाया।
निरस्त होना चाहिए अंग्रेजी का ज्ञानभाषा समीकरण
हिंदी भाषा को और समृद्ध करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकार ने जिस तरीके से पाठ्यक्रमों (अभियांत्रिकी व मेडिकल) को हिंदी व अपनी मातृभाषा में बनाया है, ऐसे ही कदम के जरिये हिंदी को और बढ़ावा दिया जाएगा। अंग्रेजी पर उन्होंने दो टूक कहा कि अंग्रेजी को लेकर जो ज्ञानभाषा समीकरण बन गया है, इसको निरस्त करना चाहिए। तब जाकर हिंदी में जो मिलावटखोरी हो रही है, वह दूर होगी।
शिल्प संग्रहालय का किया दौरा
रूस, ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका और दक्षिण कोरिया समेत 13 देशों के 31 युवा प्रतिनिधियों का एक समूह वर्तमान में भारतीय परिषद द्वारा आयोजित पहली हिंदी विश्व यात्रा के तहत भारत भ्रमण कर रहा है। दिल्ली में, उन्होंने शिल्प संग्रहालय का दौरा किया है। शुक्रवार को यह समूह वर्धा में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के साथ-साथ महाराष्ट्र में गांधी के सेवा ग्राम का दौरा करेंगे। अधिकांश प्रतिनिधियों ने धाराप्रवाह हिंदी में बात की, और उनमें से ऑस्ट्रेलिया और तंजानिया के दो युवकों ने बॉलीवुड का एक गीत भी गाया, जिससे सभी को बहुत खुशी हुई। इटली से बीट्रिस कैवेलारो (24 साल) और पोलैंड के नोवोसियन भारत पहली बार आए हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं के बारे में जानने का मौका मिल रहा है। इससे वह बेहद खुश है। दोनों की विश्वविद्यालय के छात्र है। सहस्रबुद्धे ने कहा, हम चाहते हैं कि ऐसे छात्र जो यात्रा का हिस्सा हैं, वे अपने देशों में हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति के राजदूत बनें।