केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत खुफिया सूचना जुटाने वाले इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के 'बाज', यानी मल्टी एजेंसी सेंटर (एमएसी) पर गृह मंत्री अमित शाह का खास फोकस है। गत सप्ताह नई दिल्ली में संपन्न हुए दो दिवसीय आतंकवाद विरोधी सम्मेलन में शाह ने कहा था, खुफिया जानकारी जुटाने वाले तंत्र 'मल्टी एजेंसी सेंटर' का दायरा बढ़ाया गया है। इसके तहत साइबर सुरक्षा, नार्को टेरर और उभरते कट्टरपंथी हॉटस्पॉट पर नजर रखने के लिए एसओपी बनाए गए हैं। इसकी मदद से कई अपराधों को होने से पहले ही रोकने में सफलता मिली है। उन्होंने राज्यों के पुलिस संगठन एवं खुफिया सूचनाएं एकत्रित करने वाली इकाइयों से भी आग्रह किया है कि वे 'मैक' के साथ अधिक से अधिक सूचनाएं साझा करें। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, अब मैक में खुफिया सूचनाओं के आदान प्रदान की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। अगर किसी भी केंद्रीय या राज्य की एजेंसी के पास कोई छोटा मोटा इनपुट है तो वह भी मैक में शेयर किया जाता है।
बता दें कि दो दिवसीय आतंकवाद विरोधी सम्मेलन में केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा था, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई जीतने के लिए संपूर्ण सरकारी दृष्टिकोण के साथ हमें एक एकीकृत एक्शनेबल सिस्टम बनाना होगा। आतंकवाद के वित्तपोषण, क्रिप्टो जैसी नई चुनौतियों से निपटने के लिए राज्यों के पुलिस थानों से लेकर पुलिस महानिदेशक के कार्यालय तक समन्वित अप्रोच अपनानी होगी। अब समय आ गया है कि हम 'नीड टू नो' से ड्यूटी टू शेयर की ओर बढ़ें। बता दें कि मैक, देश में उभरते सुरक्षा खतरे के परिदृश्य के बीच आतंकवादी नेटवर्क और उनके सहायक पारिस्थितिकी तंत्र को खत्म करने के लिए सभी एजेंसियों के बीच बेहतरीन तालमेल रखता है।
इससे पहले भी विभिन्न सुरक्षा बैठकों में शाह कह चुके हैं कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सातों दिन और 24 घंटे सतर्क रहना बहुत जरूरी है। इसके लिए मैक की भूमिका बढ़ जाती है। मैक में शामिल सभी एजेंसियों और उनकी सूचना के आधार पर अंतिम कार्रवाई करने वालों के बीच रियल टाइम सूचनाओं का आदान-प्रदान लगातार सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इसके मद्देनजर, मैक के ढांचे को अपनी पहुंच और प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए बड़े तकनीकी और परिचालन सुधारों से गुजारा जा रहा है।
विश्वस्त सूत्रों ने बताया, पहले मैक में कई केंद्रीय और राज्यों की एजेंसियां, खुले तौर से सूचनाओं का आदान प्रदान नहीं कर पाती थी। वजह, उन्हें लगता था कि मैक में अगर सूचना पुख्ता नहीं निकली या डेस्क पर उसे गिरा दिया गया तो बदनामी होगी। कई बार ऐसा हुआ भी था कि किसी केंद्रीय बल या एजेंसी से कोई सूचना मिली, लेकिन उस बाबत संबंधित अधिकारी पर इतने सवालों की बौछार कर दी गई कि सूचना देने वाले ही मौन रह गए। इससे मैक में सूचना भेजने वालों को यह लगने लगा कि सूचना पुख्ता नहीं हुई तो उन्हें शर्मिंदा होना पड़ सकता है। नतीजा, कई बार छोटी सूचनाएं, मैक के डेस्क से गायब होने लगी। कई ऐसे मौके भी आए, जिसमें सूचना के स्त्रोत को लेकर काफी सवाल जवाब हुए। अब मैक की प्रक्रिया को काफी सरल बनाया गया है। भले ही सूचना पुख्ता न हो, लेकिन वह अस्तित्व में है तो भी उस पर मैक में चर्चा की जाती है।
मैक में केंद्र की 26 सुरक्षा एवं जांच एजेंसियों की खुफिया विंग शामिल होती हैं। इन एजेंसियों की मदद से पर्दे के पीछे बैठकर आतंकी गतिविधियों एवं दूसरे अपराधों को विभिन्न तरीके से प्रोत्साहन देने वालों को पकड़ा जाता है। कश्मीर, माओवादी इलाके और उत्तर पूर्व के राज्यों में सक्रिय उग्रवादी समूहों को पूरी तरह खत्म करने के लिए जो समयबद्ध मुहिम शुरु की गई है, उसमें मैक की अहम भूमिका है। आर्मी, नेवी, एनआईए, सीबीआई, आईबी, रॉ, सीएपीएफ, डीआरआई व ईडी सहित 26 केंद्रीय एजेंसियां, केंद्रीय गृह मंत्रालय के मल्टी एजेंसी सेंटर (मैक) के जरिए अपनी खास रणनीति को अंजाम देती हैं। बॉर्डर क्राइम और आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए 'व्हाइट कॉलर यानी सफेदपोश अपराधी, जो पर्दे के पीछे बैठकर उन्हें वित्तीय, हथियार एवं अन्य तरीके से मदद पहुंचाने का काम करते हैं, उन्हें बाहर निकालने में भी मैक की खास भूमिका है।
मैक को लेकर इस बात पर भी चर्चा हुई कि संगठित अपराधियों की सप्लाई चेन को तोड़ना एक बड़ी चुनौती है। सभी एजेंसियों के प्रमुख इस बात पर सहमत थे। केंद्रीय गृह मंत्री शाह पहले ही कह चुके हैं कि आतंकवाद रोकने के लिए सबसे पहले इनके मददगारों को खत्म करना होगा। एक तरफ उनकी सप्लाई चेन टूटेगी और दूसरी तरफ सुरक्षा बल उन पर बड़ा वार करेंगे तो उनका पूर्ण खात्मा हो सकेगा। ग्लोबल टेरर ग्रुप, नाको टेरोरिज्म, साइबर अपराध और दूसरे मुल्क में बैठकर आतंकी वारदातों को अंजाम देने वालों पर शिकंजा कसना होगा।
इसके लिए केंद्रीय एवं राज्यों की सुरक्षा एजेंसियों को आपस में बेहतर तालमेल करना पड़ेगा। 15 से ज्यादा संगठनों को आतंकी संगठन और अनलॉफुल एसोसिएशन घोषित किया गया है। हाल में ही सात अन्य संगठनों को भी आतंकी संगठन घोषित किया गया है। आतंकवाद के खिलाफ उठाए गए सख्त कदमों के कारण एक दशक में आतंकवादी घटनाओं में 70 प्रतिशत की कमी आई है। मैक में विभिन्न एजेंसियों के मध्य सूचनाओं के तीव्र आदान प्रदान की जरुरत पर बल दिया गया है।
जांच भले ही कोई एजेंसी करें, लेकिन वह सूचना अविलंब मैक तक पहुंचनी चाहिए। आतंकियों के मददगारों का पता चलते ही एनआईए, ईडी और आईटी जैसी एजेंसियां उनके ठिकानों पर छापा मार सकती हैं। उनके पास आर्थिक स्रोत क्या है, उसका पता लगाया जाएगा। उसमें यह भी देखा जाएगा कि हवाला के जरिए तो पैसा नहीं आया है। शैल कंपनियां भी संगठित अपराध में बड़ी मददगार साबित होती हैं। इनकी जड़ों पर वार करना जरुरी है। इसके लिए राज्य एवं केंद्रीय जांच एजेंसियों के बीच तालमेल बेहतर होना चाहिए। देश में समग्र आंतरिक सुरक्षा स्थिति और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई की समीक्षा बैठक में शाह ने सभी प्रतिभागियों से मल्टी एजेंसी सेंटर में भागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया था। उन्होंने इसे एक ऐसा एकीकृत मंच बनाने पर जोर दिया, जो निर्णायक और त्वरित कार्रवाई के लिए सभी कानून प्रवर्तन एजेंसियों, नशीली दवाओं के खिलाफ एजेंसियों, साइबर सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को एक साथ लाए।मैक के जरिए इस मुहिम को आगे बढ़ाया गया है।
मुंबई में 26/11 के आतंकी हमले के बाद मैक का गठन किया गया था। इसमें आईबी, रॉ, तीनों सेनाओं की इंटेलिजेंस विंग, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की इंटेलिजेंस इकाई, वित्त मंत्रालय से जुड़ी एजेंसी जैसे 'ईडी, डीआरआई, आयकर' और आरपीएफ सहित करीब 26 एजेंसियां शामिल हैं। मैक की नियमित बैठक में सभी एजेंसियों के प्रतिनिधि मौजूद रहते हैं। वे अपनी सूचनाएं साझा करते हैं। चार वर्ष पहले जारी एक रिपोर्ट में सामने आया था कि मल्टी एजेंसी सेंटर द्वारा आतंकी हमलों, तोड़फोड़ की अन्य गतिविधियों, तस्करी और नकली करेंसी जैसे विभिन्न अपराधिक मामलों से जुड़े लगभग चार लाख इंटेलिजेंस इनपुट जारी किए गए थे। मैक से प्राप्त इनपुट के आधार पर सुरक्षा एजेंसियां मुस्तैद बनी रहती हैं। यहां के अलर्ट के बाद आतंकी हमलों से लेकर कई दूसरी वारदातों को रोका गया है। मैक के अंतर्गत ही नेशनल मेमोरी बैंक बनाया गया है। यहां पर काउंटर टेररिज्म से जुड़ी 17 हजार से अधिक फाइलें सुरक्षित रखी गई हैं। यह बैंक क्लासिफाइड इलेक्ट्रॉनिक लाइब्रेरी का हिस्सा है। टेररिज्म की फाइलों को थ्रैट मैनेजमेंट सिस्टम के साथ लिंक किया गया है।