एम्स के भ्रष्टाचार को उजागर करने वाले उत्तराखंड कैडर के भारतीय वन सेवा अधिकारी संजीव चतुर्वेदी को भारत सरकार की खुफिया एजेंसी (इंटेलिजेंस ब्यूरो) ने मेहनती अधिकारी बताया है। संजीव ने सूचना के अधिकार कानून के तहत अपने ऊपर तैयार की गई आईबी रिपोर्ट मांगी थी, जिसका आईबी ने विरोध किया है। इसी मामले की सुनवाई के दौरान संजीव को आईबी ने कर्मठ अधिकारी बताया है, लेकिन रिपोर्ट देने से इनकार किया है।
सरकार के लिए होती है आईबी की रिपोर्ट
इंटेलिजेंस ब्यूरो ने अपने हलफनामे में कहा है कि आईबी की रिपोर्ट सरकार के लिए होती है। एजेंसी की ओर से तैयार की गई रिपोर्ट संजीव चतुर्वेदी को नहीं दी जा सकती है। आईबी की रिपोर्ट गोपनीय और संवेदनशील होती है। लिहाजा ऐसी स्थिति में रिपोर्ट की जानकारी देने पर देश की सुरक्षा पर गलत प्रभाव पड़ सकता है। आईबी का 128 साल का रिकार्ड है। इस एजेंसी का देश की सुरक्षा में अहम रोल रहा है।
संजीव ने दाखिल की थी आरटीआई
भारतीय वन सेवा अधिकारी संजीव चतुर्वेदी ने जब हरियाणा से उत्तराखंड कैडर करने की अर्जी दी थी तब सरकार की ओर से इस संबंध में आईबी से रिपोर्ट मांगी गई थी। इस रिपोर्ट को पाने के लिए संजीव ने आरटीआई दाखिल की थी। इस मामले में केन्द्रीय सूचना आयोग ने संजीव के पक्ष में फैसला दिया था लेकिन आईबी ने ऊपरी अदालत में अपील की थी। जहां सीआईसी के आदेश पर रोक लगा दी गई थी। मामले की सुनवाई अभी चल रही है।
जिस अधिकारी को भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्य करने के लिए रमन मैगसेसे अवार्ड मिला और सरकार की एजेंसियां भी सराह रही है, उस अधिकारी की वर्ष-2015-16 की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट में फिसड्डी अधिकारी बताया गया है।