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IAF जेट क्रैश: '10 दिन पहले घर आए थे पुरवेश, ऑपरेशन सिंदूर में भी थे शामिल'; बेटे को याद कर भावुक हुए पिता

Fri, 06 Mar 2026 01:59 PM IST
नवीन पारमुवाल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागपुर

सार

असम में हुए सुखोई-30 विमान हादसे में नागपुर के पायलट पुरवेश दुरगकर बलिदान हो गए। उनके पिता ने बताया कि 10 दिन पहले ही वह घर आए थे और बुधवार को उनसे आखिरी बार बात हुई थी।
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बेटे पुरवेश को याद कर भावुक हुए पिता। - फोटो : अमर उजाला
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IAF Sukhoi-30 Plane Crash: असम में भारतीय वायु सेना का सुखोई-30 एमकेआई विमान क्रैश हो गया था। इस हादसे में स्क्वाड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरगकर बलिदान हो गए। पुरवेश नागपुर के रहने वाले थे। इस दुखद घटना के बाद उनके परिवार में मातम छा गया। उनके पिता रवींद्र दुरगकर का रो रोकर बुरा हाल है। उन्हें बस यही याद आ रहा है कि 10 दिन पहले ही उनका बेटा घर आया था और बुधवार को ही फोन पर बात हुई थी।
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नागपुर के न्यू सूबेदार लेआउट में पुरवेश के घर पर वायु सेना के अधिकारी परिवार को सांत्वना देने पहुंचे। उनके पिता रवींद्र दुरगकर एक रिटायर्ड रेल कर्मचारी हैं। बेटे को खोने के गम में डूबे पिता ने बताया कि पुरवेश को फाइटर जेट उड़ाने पर बहुत गर्व था।

आखिरी बार बुधवार को हुई थी बात
वायु सेना ने शुक्रवार को बताया कि असम के कार्बी आंगलोंग जिले में सुखोई-30 एमकेआई विमान क्रैश हो गया था। इसमें स्क्वाड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश शहीद हो गए। विमान गुरुवार को जोरहाट एयरबेस से ट्रेनिंग के लिए उड़ा था, जिसके बाद वह रडार से गायब हो गया। पिता रवींद्र ने नम आंखों से बताया, "हमारी बुधवार को ही बात हुई थी। उनके ग्रुप कैप्टन ने हमें फोन कर इस हादसे की जानकारी दी।"
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ऑपरेशन सिंदूर का भी थे हिस्सा
पिता ने बताया कि उनका 28 साल का बेटा पुरवेश अपने काम को लेकर बहुत समर्पित था। उसने पिछले साल पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर हुए ऑपरेशन सिंदूर में भी हिस्सा लिया था। रवींद्र ने यह भी बताया कि पुरवेश की पोस्टिंग असल में असम के तेजपुर में थी, लेकिन वहां रनवे पर काम चलने की वजह से वह जोरहाट से उड़ान भर रहा था।

एक पड़ोसी ने बताया कि पुरवेश के परिवार में उनके माता-पिता और एक बहन हैं, जो अमेरिका में रहती हैं। पुरवेश और उनकी बहन 10 दिन पहले ही एक पारिवारिक कार्यक्रम के लिए घर आए थे। पुरवेश ने अपनी स्कूली पढ़ाई नागपुर से ही की थी और वह अविवाहित थे।

पिता रवींद्र ने बताया कि उनके बेटे का पार्थिव शरीर शाम तक नागपुर पहुंचने की संभावना है। उन्होंने कहा, "मेरे बेटे को भारतीय वायु सेना का हिस्सा होने पर बहुत नाज था। वह कभी-कभी फाइटर प्लेन उड़ाने के अपने अनुभव और विमान की तेज गति के बारे में बताता था। वह अपने सहकर्मियों का बहुत सम्मान करता था।"
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