भारतीय वायुसेना ने पहली बार एक आधिकारिक वीडियो में एस-400 वायु रक्षा प्रणाली की फायरिंग का दृश्य साझा किया है। इसमें वीडियो में एस-400 वायु रक्षा प्रणाली से लक्ष्य भेदते हुए देखा जा सकता है। यह वीडियो पोकरण में होने वाले युद्धाभ्यास वायु शक्ति-2026 से ठीक एक दिन पहले साझा किया गया है।
यह वीडियो ऑपरेशन सिंदूर के दौरान की गई उस ऐतिहासिक कार्रवाई को दर्शाता है, जिसमें एस-400 ने पाकिस्तानी सीमा के 300 किलोमीटर भीतर घुसकर दुश्मन के एक विमान को मार गिराया था। वीडियो के साथ वायुसेना ने कड़ा संदेश दिया। वायुसेना में लिखा- दुश्मन सीमा से दूर हो सकता है, पर नजरों से ओझल नहीं। यह प्रणाली दुश्मन के लड़ाकू विमान और मिसाइल जैसे बड़े हवाई खतरों को लंबी दूरी से ही नष्ट करने में सक्षम है। एस-400 प्रणाली अत्याधुनिक रडार और मिसाइल तकनीक से लैस है। यह एक साथ कई लक्ष्यों पर नजर रखने और उन्हें मार गिराने की क्षमता से लैस है।
सेना ने ऑपरेशन सिंदर में रक्षा प्रणाणी का किया था इस्तेमाल
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एस-400 ने पाकिस्तानी सीमा के 300 किलोमीटर भीतर घुसकर दुश्मन के एक विमान को मार गिराया था। वीडियो के साथ वायुसेना ने कड़ा संदेश दिया। वायुसेना में लिखा- दुश्मन सीमा से दूर हो सकता है, पर नजरों से ओझल नहीं।ऑपरेशन में कम से कम एक दर्जन पाकिस्तानी विमान नष्ट या क्षतिग्रस्त हुए थे। वायुसेना की सबसे आधुनिक रक्षा प्रणाली एस-400 ने इस निर्णायक जीत में प्रमुख भूमिका निभाई थी।
एस-400 वायु रक्षा प्रणाली की प्रमुख खासियतें
- एस-400 एक अत्याधुनिक वायु रक्षा प्रणाली है, जिसे दुश्मन के हवाई हमलों से सुरक्षा के लिए तैनात किया जाता है।
- यह लड़ाकू विमान, बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल और ड्रोन को हवा में ही नष्ट करने की क्षमता रखता है।
- इसकी मारक क्षमता 40 किलोमीटर से लेकर 400 किलोमीटर तक है।
- सिस्टम 100 फीट से लेकर करीब 40 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ रहे टारगेट को निशाना बना सकता है।
- एस-400 में चार अलग-अलग रेंज की मिसाइलें होती हैं, जो अलग दूरी के लक्ष्यों को नष्ट कर सकती हैं।
- एक एस-400 रेजीमेंट में 8 लॉन्चर होते हैं और एक समय में 32 मिसाइलें दागी जा सकती हैं।
- यह सिस्टम संभावित न्यूक्लियर मिसाइल खतरे को भी हवा में ही खत्म करने में सक्षम माना जाता है।
- दुश्मन के विमानों और मिसाइलों को लंबी दूरी से ट्रैक और लॉक करने की क्षमता रखता है।
- इसे आसानी से डिटेक्ट या निशाना बनाना मुश्किल होता है क्योंकि इसकी तैनाती मोबाइल प्लेटफॉर्म पर होती है।
- माइनस 50 से माइनस 70 डिग्री सेल्सियस तक के बेहद ठंडे मौसम में भी प्रभावी ढंग से काम कर सकता है।
- नाटो देशों में इस सिस्टम को SA-21 ग्रोवलर के नाम से जाना जाता है।
- यह किसी भी क्षेत्र की हवाई सुरक्षा को मजबूत करने वाला भारतीय वायुसेना का सबसे शक्तिशाली रक्षा सिस्टम माना जाता है।
आज से शुरू हो रहा वायु शक्ति-2026 अभ्यास
27 फरवरी को पोकरण के रेगिस्तानी क्षेत्र में वायु शक्ति 2026 के तहत भारतीय आसमान में ताकत, गति और समन्वित मारक क्षमता का अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा। इस प्रदर्शन से पहले पोखरण में बृहस्पतिवार को पूर्ण पूर्वाभ्यास किया गया। इस दौरान भारतीय वायुसेना ने सभी संचालन मानकों को सफलतापूर्वक परखा। अभ्यास के दौरान सभी निर्धारित लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से नष्ट किया गया। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि वायु सेना पूरी तरह से हर मिशन के लिए तैयार है।
तेजस, मिराज, सुखोई, जगुआर होंगे शामिल
वायुसेना के इस महत्वपूर्ण अभ्यास में तेजस, राफेल, सुखोई-30 एमकेआई, मिग-29, मिराज-2000 और जगुआर जैसे लड़ाकू विमान हिस्सा लेंगे। साथ ही सी-17, सी-130जे और सी-295 जैसे बड़े ट्रांसपोर्ट विमान भी यहां उड़ान भरते दिखाई देंगे। वहीं, अपाचे हेलिकॉप्टर, चिनूक हेलिकॉप्टर, एलसीएच एमआई-17 जैसे हेलिकॉप्टर और ड्रोन भी अभ्यास का हिस्सा बनेंगे।
इस अभ्यास में 120 से ज्यादा एयरक्राफ्ट शामिल हैं। इस अभ्यास में हाल के ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का भी जिक्र होगा। इससे यह स्पष्ट संदेश दिया जाएगा कि भारतीय वायुसेना हवा में दबदबा बनाने और लंबी दूरी तक सटीक वार करने में पूरी तरह सक्षम है। वायु शक्ति 2026 में अत्याधुनिक लड़ाकू विमान, परिवहन विमान और हेलिकॉप्टर अपनी समन्वित क्षमता का प्रदर्शन करेंगे।
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