वायु सेना ने सुखोई-30 विमानों की क्षमता को बढ़ाया
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भारतीय वायु लगातार अपने आप को मजबूत कर रही है। इसके लिए नए उपकरणों को खरीदने से लेकर पुराने लड़ाकू विमानों को अपडेट कर रही है। वहीं अब वायु सेना अपने पसंदीदा लड़ाकू विमानों में एक सुखोई-30 की क्षमताओं को और मजबूत करने जा रही है। भारतीय वायु सेना सुखोई-30 को एक नई मिसाइल से लैस कर रही है, जो 250 किलोमीटर से अधिक की दूरी से जमीन पर स्थित लक्ष्यों को मार गिरा सकती है।
250 किलोमीटर से अधिक के लक्ष्य को मार सकती है मिसाइल
रक्षा सूत्रों ने एएनआई को बताया कि नई हाई-स्पीड लो ड्रैग मिसाइल 250 किलोमीटर से अधिक के लक्ष्य को मार सकती है और विमान की क्षमता को बढ़ावा देगी। इससे भारतीय वायु सेना को दुश्मन के सैन्य शिविरों और आतंकवादी बुनियादी ढांचे पर हमला करने में काफी आसानी होगी, जैसा कि उसने 2019 में बालाकोट ऑपरेशन के दौरान अपने क्षेत्र के भीतर से किया था।
अपग्रेड करने का काम जल्द शुरू होगा
सूत्रों ने कहा कि नई मिसाइल भारतीय वायुसेना के सुखोई-30 बेड़े के लिए महत्वपूर्ण होगी क्योंकि वैश्विक स्थिति के मद्देनजर यूरोपीय या अमेरिकी मूल की लंबी दूरी की मिसाइलों को एकीकृत करना आसान नहीं होगा। इसी कारण से भारतीय वायु सेना भी सुखोई-30 को अपग्रेड कर रहा है, जिसकी लागत 30,000 रुपये से अधिक होने की उम्मीद है और यह 85 विमानों के साथ शुरू होगा।
260 भारी वायु श्रेष्ठता वाले लड़ाकू जेट
भारतीय वायुसेना के पास वर्तमान में इनमें से लगभग 260 भारी वायु श्रेष्ठता वाले लड़ाकू जेट हैं जो अब बल के सबसे आधुनिक राफेल लड़ाकू विमानों के साथ उड़ान भर रहे हैं। वायुसेना ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों को शामिल करके सुखोई-30 की क्षमताओं को बड़े पैमाने पर मजबूत किया है, जो 500 किलोमीटर से अधिक दूरी के लक्ष्यों को मार सकती है।
हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों में भी सुधार देखा गया है, जबकि मेड-इन-इंडिया एस्ट्रा-ऑल वेदर बियॉन्ड-विजुअल-रेंज एयर-टू-एयर और रुद्रम एंटी-रेडिएशन नेक्स्ट-जनरेशन मिसाइलों को बेड़े में शामिल किया गया है। ब्रह्मोस क्षमता वायु सेना को एस-400 वायु रक्षा प्रणाली जैसे किसी भी लंबी दूरी के ट्रैकिंग रडार से निपटने में मदद कर सकती है।