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I-PAC ED Raid: आई-पैक के निदेशक ऋषि राज सिंह के प्रतिनिधि ईडी के सामने हुए पेश, छापेमारी मामले में जांच तेज

Mon, 20 Apr 2026 10:31 PM IST
Himanshu Singh Chandel पीटीआई, नई दिल्ली

सार

राजनीतिक सलाहकार फर्म आई-पैक के निदेशक ऋषि राज सिंह के प्रतिनिधि ईडी के सामने पेश हुए। मामला 50 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग और खातों में हेराफेरी से जुड़ा है। ईडी ने हाल ही में निदेशक विनेश चंदेल को गिरफ्तार किया था और ऋषि राज के ठिकानों से इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स जब्त किए थे। 
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ईडी। - फोटो : ANI
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विस्तार
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राजनीतिक गलियारों में हलचल मचाने वाली कूटनीति और चुनावी रणनीतियों के लिए मशहूर संस्था आई-पैक (I-PAC) इन दिनों कानूनी मुश्किलों के घेरे में है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा की जा रही छापेमारी और जांच के बाद अब मामला कड़ाई की ओर बढ़ रहा है। इस पूरी कार्रवाई ने न केवल संस्था के कामकाज पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि राजनीतिक दलों के साथ इसके वित्तीय संबंधों को भी जांच के रडार पर ला खड़ा किया है। इसी क्रम में आई-पैक के निदेशक ऋषि राज सिंह से जुड़े मामले में सोमवार को एक नया मोड़ आया, जब उनके कानूनी प्रतिनिधि दिल्ली में जांच एजेंसी के समक्ष पेश हुए।
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ऋषि राज सिंह के प्रतिनिधि ईडी के समक्ष क्यों पेश हुए?
प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों के अनुसार, आई-पैक के निदेशक ऋषि राज सिंह के एक अधिकृत प्रतिनिधि सोमवार को दिल्ली में जांच अधिकारी के सामने पेश हुए। यह पेशी मुख्य रूप से उन इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की जांच में सहयोग करने के लिए थी। इन्हें 2 अप्रैल को ऋषि राज सिंह के ठिकानों पर हुई छापेमारी के दौरान जब्त किया गया था। ईडी को इन उपकरणों से डेटा (डंप) निकालना था, ताकि डिजिटल साक्ष्यों को सबूत के तौर पर इकट्ठा किया जा सके। चूंकि हालिया छापेमारी में भारी मात्रा में डिजिटल उपकरण बरामद हुए थे, इसलिए तकनीकी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए प्रतिनिधि की उपस्थिति अनिवार्य थी।

आई-पैक और इसके निदेशकों पर क्या आरोप हैं?
आई-पैक (इंडियन पीएसी कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड) की स्थापना साल 2015 में हुई थी और यह वर्तमान में पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और तमिलनाडु में डीएमके जैसे बड़े दलों के लिए काम कर रही है। इस मामले की शुरुआत दिल्ली पुलिस की एक प्राथमिकी (FIR) से हुई थी, जिसमें खातों में हेराफेरी और बेहिसाब धन के लेन-देन का आरोप लगाया गया था। ईडी का दावा है कि आई-पैक लगभग 50 करोड़ रुपये की 'अपराध की कमाई' की मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल रही है। एजेंसी को जांच में वित्तीय अनियमितताओं के कई उदाहरण मिले हैं, जिसमें फर्जी बिल जारी करना और बिना किसी व्यावसायिक साख के असुरक्षित ऋण प्राप्त करना शामिल है।
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क्या विनेश चंदेल की गिरफ्तारी का संबंध इस केस से है?
आई-पैक के तीन संस्थापक निदेशकों में ऋषि राज सिंह, विनेश चंदेल और प्रतीक जैन शामिल हैं। ईडी ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए विनेश चंदेल को 13 अप्रैल को पूछताछ के बाद दिल्ली से गिरफ्तार किया था। चंदेल फिलहाल ईडी की हिरासत में हैं और उनसे पूछताछ जारी है। अधिकारियों का कहना है कि यह पूरा मामला कोयला "घोटाले" की जांच से भी जुड़ा हुआ है। ईडी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या चुनावी रणनीतियों के नाम पर काले धन को सफेद किया गया या हवाला चैनलों के जरिए नकदी का इधर-उधर संचार किया गया।

ममता बनर्जी के दखल ने इस मामले को विवादित क्यों बनाया?
यह मामला तब और अधिक राजनीतिक हो गया जब 8 जनवरी को कोलकाता में आई-पैक के कार्यालय और प्रतीक जैन के परिसर पर ईडी ने छापा मारा था। उस दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद मौके पर पहुँच गई थीं। आरोप है कि उन्होंने वहां से कुछ दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए थे और दावा किया था कि ईडी उनकी पार्टी की चुनावी रणनीति से जुड़े कागजात चुराने की कोशिश कर रही है। इस घटना को ईडी ने "सत्ता का घोर दुरुपयोग" बताया है। इस मामले को लेकर जांच एजेंसी ने कलकत्ता उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है और पूरे घटनाक्रम की सीबीआई जांच की मांग की है।
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इस जांच का चुनावी राज्यों और अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा?
वर्तमान में जिन राज्यों में चुनाव होने वाले हैं, वहां आई-पैक की सक्रियता को देखते हुए यह जांच बेहद संवेदनशील मानी जा रही है। जांच एजेंसी का आरोप है कि तीसरे पक्ष से धन प्राप्त करना और उसे हवाला के जरिए घुमाना गंभीर आर्थिक अपराध है। जिस तरह से 'गले लगाने वाली कूटनीति' के जरिए व्यापारिक और राजनीतिक संबंध बनाए जाते हैं, उस पर अब कानून का शिकंजा कस रहा है। ऋषि राज सिंह के प्रतिनिधि की पेशी यह साफ करती है कि आने वाले दिनों में जांच और तेज होगी और जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से निकलने वाले तथ्य इस मामले की दिशा तय करेंगे।

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