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Zakir Hussain: 'मैंने उनके लिए तबले बनाए, उन्होंने मेरी जिंदगी', जाकिर हुसैन के निधन पर हरिदास का भावुक संदेश

Mon, 16 Dec 2024 11:44 AM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

Haridas Vhatkar: उस्ताद जाकिर हुसैन का सोमवार सुबह अमेरिका में दिल और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों के कारण निधन हो गया। वे काफी समय से अस्वस्थ थे।हरिदास व्हटकर उस्ताद जाकिर हुसैन के लिए 1998 से तबले बना रहे थे। 
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जाकिर हुसैन - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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उस्ताद जाकिर हुसैन के निधन पर उनका परिवार और प्रशंसक दुखी हैं। वहीं एक ऐसे शख्स को भी उनके निधन से गहरा धक्का लगा है। उस्ताद जाकिर हुसैन का निधन उनका तबला बनाने वाले हरिदास व्हटकर के लिए बड़ा झटका है। हरिदास व्हटकर कहते हैं कि मैंने उनके लिए तबले बनाए, उन्होंने मेरी जिंदगी बना दी। अपने सबसे लोकप्रिय गाहक निधन मेरे लिए बड़ी क्षति है। भावुक हरिदास ने कहा कि मैंने सबसे पहले उनके पिता अल्ला रक्खा के लिए तबला बनाया था। इसके बाद मैं साल 1998 से जाकिर हुसैन के लिए तबले बना रहा हूं। 

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उस्ताद जाकिर हुसैन का सोमवार सुबह अमेरिका में दिल और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों के कारण निधन हो गया। वे काफी समय से अस्वस्थ थे मुंबई के कांजुरमार्ग में अपनी कार्यशाला में हरिदास व्हटकर ने कहा कि उस्ताद जाकिर हुसैन से मेरी आखिरी मुलाकात इस साल अगस्त में मुंबई में हुई थी। वह गुरु पूर्णिमा का दिन था। मैं उनसे एक हॉल में मिला था। इसके अगले दिन मैं नेपियन सी रोड के नजदीक शिमला हाउस कोऑपरेटिव सोसाइटी में उनके घर गया। यहां मेरी उनसे काफी देर तक बातचीत हुई। हरिदास ने बताया कि वे इसे लेकर बेहद गंभीर रहते थे कि उनको कब और कैसा तबला चाहिए। वे वाद्ययंत्र की ध्वनि को लेकर बेहद सजग रहते थे।

हरिदास ने यह भी कहा कि मैंने दो दशकों में उनके लिए अनगिनत तबले बनाए। मेरे पास ऐसे कई तबले हैं, जो उन्होंने मेरे लिए छोड़े थे। मैं उनके लिए नए तबले तो बनाता ही था। साथ ही उनके संग्रह के लिए तबलों की मरम्मत भी करता था। मैंने उनके लिए तबले बनाए, उन्होंने मेरी जिंदगी बना दी। व्हटकर ने कहा कि जब उस्ताद को जरूरत होती थी तब वे मुझे नए तबले और कुछ पुराने वाद्ययंत्रों की मरम्मत के लिए याद करते थे। 
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हरिदास अपने बाबा केराप्पा रामचंद्र व्हटकर और पिता रामचंद्र व्हटकर के पद चिह्नों पर चलकर तबला बनाने की कला सीखी है। उन्होंने कहा कि हमारे बीच महीनों के अंतराल में बात हुई थी। यह ऐसी बातचीत नहीं थी जिसे आप सामान्य बातचीत कह सकते हैं। हरिदास के बेटे किशोर और मनोज भी तबला बनाने की अपनी पारिवारिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। हरिदास 1994 में मुंबई आए थे और उन्होंने प्रसिद्ध हरिभाऊ विश्वनाथ कंपनी में तबला बनाने का काम शुरू किया था। 
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